केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एसएमसी के लिए बनाईं गाइडलाइन, स्कूल प्रबंधन में जनता की भूमिका बढ़ेगी

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एसएमसी के लिए बनाईं गाइडलाइन, स्कूल प्रबंधन में जनता की भूमिका बढ़ेगी
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के लिए नए दिशानिर्देश 2026 बनाए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किए गए यह दिशानिर्देश देशभर में 12वीं कक्षा तक शिक्षा व्यवस्था में सामुदायिक भागीदारी के लिए है। इनमें अभिभावक, शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समुदाय के सदस्य होंगे।

नई दिल्ली, 1 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के लिए नए दिशानिर्देश 2026 बनाए हैं। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप तैयार किए गए यह दिशानिर्देश देशभर में 12वीं कक्षा तक शिक्षा व्यवस्था में सामुदायिक भागीदारी के लिए है। इनमें अभिभावक, शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समुदाय के सदस्य होंगे।

स्कूल प्रबंधन समिति व नए दिशानिर्देशों का उद्देश्य स्कूलों को अधिक जवाबदेह व पारदर्शी बनाना है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान जल्द ही स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के लिए नए दिशानिर्देश 2026 का औपचारिक आरंभ करेंगे। यह पहल देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था में सामुदायिक भागीदारी को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

दरअसल स्कूल प्रबंधन समितियां वे मंच हैं जिनमें अभिभावक, शिक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधि और समुदाय के सदस्य मिलकर स्कूलों के संचालन, निगरानी और विकास से जुड़े निर्णयों में भाग लेते हैं। इसका उद्देश्य स्कूलों को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और विद्यार्थियों के सीखने के परिणामों के प्रति संवेदनशील बनाना है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार नए दिशानिर्देश राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप तैयार किए गए हैं। इन दिशा निर्देशों का लक्ष्य शिक्षा व्यवस्था को अधिक सहभागी और स्थानीय स्तर पर सशक्त बनाना है। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि इसके तहत बिलकुल शुरुआती कक्षाओं यानी बालवाटिका से लेकर कक्षा 12 तक स्कूलों के प्रबंधन में समुदाय की सक्रिय भूमिका को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।

इन दिशानिर्देशों के लागू होने से स्कूलों की निर्णय प्रक्रिया में आम लोगों की भागीदारी और अधिक प्रभावी होने की उम्मीद है। इससे न केवल शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, बल्कि स्कूलों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार अधिक व्यावहारिक और परिणामोन्मुख बनाया जा सकेगा। यह पहल भारत के उस दृष्टिकोण को भी मजबूत करती है जिसमें शिक्षा को केवल संस्थागत ढांचे तक सीमित न रखकर समुदाय आधारित सहयोगी व्यवस्था के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसे ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना की दिशा में एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम माना जा रहा है।

स्कूल प्रबंधन समितियों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठकें भी आयोजित की जा चुकी हैं। शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि स्कूल प्रबंधन समितियां (एसएमसी) प्रभावी स्कूल प्रशासन की महत्वपूर्ण उत्प्रेरक हैं। ये समितियां शैक्षणिक परिणामों में सुधार व जवाबदेही बढ़ाने में मदद करती हैं। इसके अलावा शिक्षा में समानता सुनिश्चित करने, अभिभावकों और समुदाय की आवाज को निर्णय प्रक्रिया में शामिल कराने का काम भी करती हैं। साथ ही स्कूल प्रबंधन समितियां विद्यालयी शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं।

--आईएएनएस

जीसीबी/वीसी

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Created On :   1 May 2026 4:45 PM IST

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