'कोई भी बचपन बाल- विवाह की भेंट न चढ़े' एनसीडब्ल्यू ने जारी की एडवाइजरी
नई दिल्ली, 18 अप्रैल (आईएएनएस)। देश के कुछ हिस्सों में बाल विवाह की घटनाओं को लेकर चिंता के बीच, राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर बाल विवाह रोकने के लिए तत्काल और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
विजया रहाटकर ने सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशकों को भी पत्र लिखकर कानून के सख्त पालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह परामर्श राज्य महिला आयोगों की अध्यक्षों को भी भेजा गया है, ताकि वे सतर्क निगरानीकर्ता के रूप में कार्य करते हुए बाल विवाह की घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।
अक्षय तृतीया जैसे शुभ अवसरों पर पारंपरिक मान्यताओं और सामूहिक विवाह समारोह के कारण बाल विवाह के मामले बढ़ जाते हैं। बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत प्रतिबंध के बावजूद यह प्रथा जारी है, जो बालिकाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और समग्र विकास पर गंभीर प्रभाव डालती है।
बाल विवाह एक संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध है। इसमें केवल माता-पिता ही नहीं, बल्कि विवाह में शामिल सभी व्यक्ति—जैसे दूल्हा, पुजारी और विवाह स्थल के संचालक आदि भी कानूनी कार्रवाई के दायरे में आते हैं। कानून के तहत दोषियों को दो वर्ष तक के कठोर कारावास और 1 लाख रुपए तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।
एडवाइजरी में आयोग ने मुख्य सचिवों को निम्नलिखित उपाय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जिनमें बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम, 2006 का सभी जिलों में सख्ती से पालन सुनिश्चित करना; जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस अधीक्षक और बाल विवाह प्रतिषेध अधिकारियों को सतर्क रहने तथा शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई और मामले दर्ज करने के निर्देश देना; विशेष रूप से संवेदनशील जिलों में समुदाय स्तर पर जागरूकता अभियान चलाना; स्थानीय निकायों, स्वयंसेवी संस्थाओं और सामुदायिक नेताओं के साथ समन्वय कर संभावित मामलों की पहचान और रोकथाम करना; अक्षय तृतीया के आसपास की अवधि में बाल सहायता दूरभाष सेवा (1098) और पुलिस सहायता दूरभाष सेवा (112) को सक्रिय रखना तथा नियंत्रण कक्ष स्थापित करना; सामूहिक विवाह कार्यक्रमों की निगरानी करना और आयु सत्यापन की प्रक्रिया का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना; नागरिकों को संदिग्ध बाल विवाह की सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करना; साथ ही सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखा जाना शामिल है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने मुख्य सचिवों से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर विभिन्न विभागों के बीच समन्वय सुनिश्चित करने का आह्वान किया है। आयोग ने बच्चों, विशेषकर बालिकाओं, के अधिकारों और गरिमा की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि किसी भी बच्चे को विवाह के लिए मजबूर नहीं होने दिया जाएगा।
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Created On :   18 April 2026 6:33 PM IST











