केवीआईसी घोटाला 3.89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में ईडी की कार्रवाई, 6 आरोपियों के खिलाफ शिकायत

केवीआईसी घोटाला  3.89 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग में ईडी की कार्रवाई, 6 आरोपियों के खिलाफ शिकायत
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक अहम मामले में छह आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है। यह शिकायत 24 मार्च 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत रांची की विशेष अदालत में दायर की गई है।

रांची, 25 मार्च (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रांची जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक अहम मामले में छह आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दर्ज की है। यह शिकायत 24 मार्च 2026 को मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत रांची की विशेष अदालत में दायर की गई है।

इस मामले में सुनील कुमार, जो उस समय केवीआईसी रांची में एग्जीक्यूटिव थे, मुख्य आरोपी हैं। उनके अलावा अमन कुमार, साहिल, प्रिया, बिनोद कुमार बैठा, जो केवीआईसी में सीनियर एग्जीक्यूटिव (प्रशासन और एचआर) के पद पर थे, और बांकू निषाद को भी आरोपी बनाया गया है। ईडी ने यह जांच सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, रांची द्वारा दर्ज एफआईआर और चार्जशीट के आधार पर शुरू की थी, जिसमें धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए थे।

जांच में पता चला कि यह मामला केवीआईसी के राज्य कार्यालय, रांची में सरकारी धन के गबन से जुड़ा है। आरोप है कि सुनील कुमार ने अपने रिश्तेदारों और अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर फर्जी संस्थाएं बनाई थीं, जिनमें एक शेल कंपनी भी शामिल थी। इन संस्थाओं के जरिए खादी सुधार और विकास कार्यक्रम के तहत मंजूर करीब 3.89 करोड़ रुपए बिना किसी वास्तविक काम के निजी खातों में ट्रांसफर कर दिए गए।

ईडी के मुताबिक, इस रकम को छिपाने के लिए कई बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया। रिश्तेदारों ने अपने बैंक खाते और साइन किए हुए खाली चेक उपलब्ध कराए, जिससे पैसों का लेन-देन आसानी से किया जा सका। बाद में इस पैसे को रांची के ओरमांझी इलाके में अचल संपत्तियों में निवेश किया गया, जो सुनील कुमार की पत्नी के नाम पर खरीदी गई थीं। इन संपत्तियों की रजिस्ट्री में उनकी वास्तविक कीमत कम दिखाकर धन के स्रोत को छिपाने की कोशिश की गई।

जांच के दौरान 20 मार्च 2025 को सुनील कुमार के घर पर छापेमारी की गई थी। इसके बाद ईडी ने लगभग 71.91 लाख रुपए की चल और अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया, जिसे बाद में संबंधित प्राधिकरण ने मंजूरी दे दी। इसके अलावा, मामले से जुड़े 31.11 लाख रुपए, जो एक ट्रस्ट को भेजे गए थे, ट्रस्ट ने स्वेच्छा से वापस कर दिए और अब यह राशि ईडी के पास जमा है। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है और आगे की जांच जारी है।

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Created On :   25 March 2026 7:14 PM IST

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