महामृत्युंजय मंदिर मायावी हैं मंडी में विराजमान भगवान शिव, दिन में पांच बार बदलते हैं चेहरे पर भाव

महामृत्युंजय मंदिर मायावी हैं मंडी में विराजमान भगवान शिव, दिन में पांच बार बदलते हैं चेहरे पर भाव
प्राचीन शिव मंदिरों से लेकर 12 ज्योतिर्लिंगों में भगवान शिव की आराधना शिवलिंग के रूप में होती है। भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित कर कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं, लेकिन हिमाचल के मंडी में ऐसा शिव मंदिर है, जहां मौत भी आकर घुटने टेक देती है। हम बात कर रहे हैं मंडी में स्थापित रहस्यमयी महामृत्युंजय मंदिर की। माना जाता है कि यहां मौत भी अपना रास्ता बदल लेती है।

नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। प्राचीन शिव मंदिरों से लेकर 12 ज्योतिर्लिंगों में भगवान शिव की आराधना शिवलिंग के रूप में होती है। भक्त शिवलिंग पर जल अर्पित कर कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं, लेकिन हिमाचल के मंडी में ऐसा शिव मंदिर है, जहां मौत भी आकर घुटने टेक देती है। हम बात कर रहे हैं मंडी में स्थापित रहस्यमयी महामृत्युंजय मंदिर की। माना जाता है कि यहां मौत भी अपना रास्ता बदल लेती है।

मंडी के मुख्य बस स्टैंड से कुछ दूरी पर रहस्यमयी महामृत्युंजय मंदिर है, जहां भक्तों को भय से मुक्ति मिलती है। खास बात यह है कि मंदिर में शिवलिंग की पूजा नहीं होती, बल्कि यह विश्व का एकमात्र शिव मंदिर है जहां महादेव की पूजा मूर्ति रूप में की जाती है।

मंदिर के गर्भगृह में भगवान शिव की चतुर्भुज मूर्ति स्थापित है और भगवान शिव स्याह काले अवतार लिए ध्यान की अवस्था में बैठे हैं। उनके साथ एक तरफ मां दुर्गा तो दूसरी तरफ भगवान गणेश विराजमान हैं।

प्रतिमा की खास बात यह है कि प्रतिमा को भक्त रहस्यमयी और चमत्कारी मानते हैं, क्योंकि प्रतिमा के चेहरे के भाव दिन में पांच बार बदलते हैं। स्थानीय मान्यता है कि बाबा के मुंह पर आनंद, शांति, क्रोध, तीव्रता और मायावी भाव देखने को मिलते हैं। मान्यता है कि यह भाव भगवान शिव और भक्तों के बीच संवाद की निशानी है। शिव की अभिव्यक्तियां दर्शन करने वाले भक्तों की भावनात्मक और आध्यात्मिक स्थिति को दर्शाती हैं। मूर्ति और भक्तों के बीच इस संवाद के कारण ही मंदिर चमत्कारों और मनोकामना पूर्ति के लिए प्रसिद्ध है।

मंदिर की बनावट की बात करें तो मंदिर बहुत प्राचीन है और मंदिर की दीवारों पर नक्काशीदार मूर्तियों और पारंपरिक वास्तुकला को उकेरा गया है। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण दो राजाओं ने मिलकर कराया था। पहले 1637 ई. में राजा सूरज सेन ने निर्माण कराया था, लेकिन उसके बाद मंडी के राजा सिद्ध ने निर्माण कार्य आगे बढ़ाया। रहस्यमयी महामृत्युंजय मंदिर में भक्त असमय मृत्यु से बचाव, शारीरिक रोगों और भावनात्मक पीड़ाओं से मुक्ति, मानसिक शांति और नकारात्मकता से मुक्ति पाने के लिए आते हैं।

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Created On :   29 March 2026 5:47 PM IST

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