मुकुल ने बिजनौर का नाम किया रोशन, रस्सी कूद में बनाया रिकॉर्ड

मुकुल ने बिजनौर का नाम किया रोशन, रस्सी कूद में बनाया रिकॉर्ड
उत्तर प्रदेश के बिजनौर के युवा खिलाड़ी मुकुल कुमार ने रोप स्किपिंग (रस्सी कूद) में शानदार प्रदर्शन कर एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और बेहतरीन फिटनेस के दम पर उन्होंने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाकर जिले और देश का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि की सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है।

बिजनौर, 16 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के बिजनौर के युवा खिलाड़ी मुकुल कुमार ने रोप स्किपिंग (रस्सी कूद) में शानदार प्रदर्शन कर एक अनोखा रिकॉर्ड अपने नाम किया है। अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और बेहतरीन फिटनेस के दम पर उन्होंने एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में जगह बनाकर जिले और देश का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि की सोशल मीडिया पर भी खूब चर्चा हो रही है।

मुकुल कुमार ने आंखों पर पट्टी बांधकर केवल दाएं पैर से 30 सेकंड में 84 बार रस्सी कूदने का रिकॉर्ड बनाया। आंखों पर पट्टी बांधकर एक पैर से सबसे अधिक बार रस्सी कूदने का यह नया एशियाई रिकॉर्ड है। मुकुल ने यह उपलब्धि 18 वर्ष, 3 महीने और 14 दिन की आयु में हासिल की, जो उनकी असाधारण शारीरिक क्षमता, संतुलन और अभ्यास का प्रमाण है।

इस उपलब्धि के पीछे लगातार प्रशिक्षण और समर्पण की बड़ी भूमिका रही। मुकुल ने बिजनौर स्थित 'वैनिला स्पोर्ट्स एंड फिटनेस सेंटर' में नियमित अभ्यास करते हुए इस रिकॉर्ड की तैयारी की। लंबे समय तक कठिन अभ्यास और फिटनेस पर विशेष ध्यान देने के बाद वह इस मुकाम तक पहुंचे।

मुकुल की सफलता पर उनके पूर्व विद्यालय यूनिवर्सल एकेडमी, बिजनौर ने भी उन्हें सम्मानित किया। एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होने की खुशी में स्कूल प्रबंधन ने उन्हें 11 हजार रुपये का चेक देकर सम्मानित किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने उनकी उपलब्धि की सराहना करते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुकुल ने इस रिकॉर्ड के लिए एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की आधिकारिक वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन किया था, जिसके बाद उनके प्रदर्शन का सत्यापन कर उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गया।

अब मुकुल कुमार का अगला लक्ष्य गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराना है। उनका मानना है कि लगातार मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बल पर वे यह सपना भी जरूर पूरा करेंगे। मुकुल की उपलब्धि देश के युवाओं के लिए प्रेरणा है और यह साबित करती है कि छोटे शहरों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकती हैं।

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Created On :   16 July 2026 5:00 PM IST

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