सदन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से नीति निर्माण में जमीनी स्तर पर समझ मजबूत होगी किरण बेदी
नई दिल्ली, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। महिला आरक्षण संशोधन बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) को लेकर देशभर में चर्चा तेज है और इस पर विभिन्न राजनीतिक और प्रशासनिक हस्तियों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। रिटायर्ड आईपीएस अधिकारी और पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी ने इस बिल के प्रभावों पर अपनी राय रखते हुए कहा कि महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से शासन और नीति निर्माण में जमीनी स्तर की समझ और दृष्टिकोण को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत के दौरान कहा कि लोकसभा में महिलाओं की सीटों की संख्या बढ़ने से समाज की जरूरतों को एक अलग और अधिक व्यापक नजरिए से समझा जा सकेगा। इससे न केवल महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी, बल्कि उनके भीतर सुरक्षा की भावना भी मजबूत होगी और समाज में संतुलित विकास को बढ़ावा मिलेगा।
वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि नई संसद के गठन के बाद सबसे पहले महिला आरक्षण बिल को पारित करना सरकार की प्राथमिकता को दर्शाता है।
उनके अनुसार, महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का यह निर्णय ऐतिहासिक है और इस पर संसद में होने वाली चर्चा बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। अपर्णा यादव ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, केवल वादे करने में नहीं बल्कि उन्हें पूरा करने में विश्वास रखती है।
अपर्णा यादव ने अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा से जुड़कर वह खुद को उत्साहित और गौरवान्वित महसूस करती हैं। उन्होंने कहा कि यह संगठन राष्ट्र सेवा के प्रति समर्पित है और देश की चेतना को जागृत करने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।
राजस्थान भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष राखी राठौड़ ने भी महिला आरक्षण बिल का समर्थन करते हुए कहा कि यह महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम होगा। उनके अनुसार, इससे संसद में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा और उन्हें नीति निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।
इसी कड़ी में बिहार की पूर्व उपमुख्यमंत्री रेणु देवी ने भी इस बिल के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यदि संसद में 273 महिला सांसद होंगी, तो नीतियां और फैसले महिलाओं के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाएंगे।
उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुलाए गए विशेष सत्र में सहयोग करें और इस बिल को पारित कराने में योगदान दें। साथ ही, उन्होंने विपक्ष, विशेष रूप से यूपीए, पर निशाना साधते हुए कहा कि कुछ दल इसमें शामिल होने से बच रहे हैं, जबकि यह मुद्दा महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़ा हुआ है।
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Created On :   6 April 2026 9:14 PM IST












