नौसेना में शामिल होगा ‘निपुण’, गोताखोरी व पनडुब्बी बचाव मिशन की बढ़ेगी ताकत
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना का दूसरा स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट पोत ‘निपुण’ नौसैनिक बेड़े में शामिल होने जा रहा है। ‘निपुण’ को खास तौर पर गहरे समुद्र में गोताखोरी और पानी के नीचे होने वाले मिशन अंजाम देने के लिए तैयार किया गया है। जहां सामान्य पोत समुद्र की सतह पर काम करते हैं, वहीं ‘निपुण’ की भूमिका समुद्र की गहराइयों तक जाती है। इसमें आधुनिक गोताखोरी प्रणालियां लगाई गई हैं। इनके जरिए कठिन समुद्री परिस्थितियों में लंबे समय तक गोताखोरों को सहायता दी जा सकती है।
पानी के नीचे किसी वस्तु की जांच हो या जटिल हस्तक्षेप अभियान, ‘निपुण’ इसके लिए भी तैयार रहेगा। इसको 31 अगस्त को नौसेना में शामिल किया जाएगा। ‘निपुण’ भारतीय नौसेना की पनडुब्बी बचाव क्षमता को भी मजबूत करेगा। किसी पनडुब्बी के समुद्र की गहराई में संकट में फंसने की स्थिति में ऐसे विशेष पोत बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ‘निपुण’ गोताखोरों और पानी के नीचे होने वाले बचाव अभियानों को आवश्यक सहायता उपलब्ध करा सकेगा। पोत में गोताखोरी, पानी के नीचे हस्तक्षेप और चिकित्सकीय सहायता के लिए विशेष सुविधाएं भी हैं। मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में होने वाले समारोह में ‘निपुण’ को औपचारिक रूप से नौसेना के बेड़े का हिस्सा बनाया जाएगा। यह निस्तार श्रेणी का दूसरा डाइविंग सपोर्ट पोत है।
नौसेना के मुताबिक, ‘निपुण’ में आधुनिक नौवहन और पोत प्रबंधन प्रणालियां लगाई गई हैं। इसमें सटीक स्थिति बनाए रखने की क्षमता भी है। इसका फायदा पानी के नीचे जटिल अभियानों के दौरान मिलेगा। पोत समुद्र में अपनी स्थिति को नियंत्रित रखते हुए गोताखोरों को लगातार सहायता दे सकेगा। ‘निपुण’ का डिजाइन और निर्माण पूरी तरह भारत में हुआ है। इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड, विशाखापत्तनम ने बनाया है। यह भारत की रक्षा जहाज निर्माण क्षमता के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। पोत का निर्माण देश में हुआ है और इसमें अत्याधुनिक विशेष प्रणालियां शामिल की गई हैं।
व्यापक उपकरण स्थापना और परीक्षणों के बाद ‘निपुण’ को 30 जुलाई 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया था। अब 31 अगस्त को इसके ऑपरेशनल सफर की औपचारिक शुरुआत होगी। ‘निपुण’ के पोत-चिह्न में एक व्हेल और आधुनिक गोताखोरी हेलमेट को प्रमुखता दी गई है। व्हेल समुद्र की अत्यधिक गहराई तक जाने और लंबे समय तक पानी के भीतर रहने के लिए जानी जाती है। इसलिए यह धैर्य, सहनशीलता और लंबे अभियानों का प्रतीक है। वहीं, गोताखोरी हेलमेट इस पोत के सबसे महत्वपूर्ण साथी यानी गोताखोर को दर्शाता है।
यह आधुनिक गोताखोरी प्रणालियों और जीवन रक्षक सुविधाओं का भी प्रतीक है। ये दोनों प्रतीक मिलकर ‘निपुण’ की पूरी भूमिका को सामने रखते हैं। गोताखोर को समुद्र की गहराई तक ले जाना, वहां लंबे समय तक सुरक्षित रखना और सुरक्षित वापस लाना।
‘निपुण’ के नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री सुरक्षा क्षमता और मजबूत होगी। खास तौर पर गहरे समुद्र में गोताखोरी, पानी के नीचे हस्तक्षेप और पनडुब्बी बचाव अभियानों में नौसेना को अतिरिक्त क्षमता मिलेगी। इसका स्वदेशी निर्माण यह भी दिखाता है कि भारत का जहाज निर्माण क्षेत्र अब केवल सामान्य युद्धपोतों तक सीमित नहीं है। देश में विशेष भूमिका वाले अत्याधुनिक पोत भी तैयार किए जा रहे हैं।
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Created On :   25 Aug 2026 5:11 PM IST












