नीमच लखपति दीदी योजना से संवर रही ग्रामीण महिलाओं की जिंदगी, आत्मनिर्भरता को मिली उड़ान

नीमच, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई लखपति दीदी योजना के सकारात्मक परिणाम नीमच जिले के गांवों में दिखाई दे रहे हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएल) के अंतर्गत गठित स्व-सहायता समूहों से जुड़कर ग्रामीण महिलाएं अपना रोजगार शुरू कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कभी घर की चारदीवारी और चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज व्यवसाय संचालित करने के साथ दूसरी महिलाओं को भी रोजगार और आत्मनिर्भरता की राह दिखा रही हैं।
नीमच जिले के विभिन्न गांवों में महिलाओं ने स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आरएफ, सीआईएफ और सीसीएल के तहत वित्तीय सहायता और ऋण प्राप्त कर आटा चक्की, पत्तल-दोना निर्माण, डेयरी फार्मिंग, सिलाई, किराना दुकान, जनरल स्टोर और कपड़ों के व्यवसाय जैसे काम शुरू किए हैं। इन गतिविधियों से उनकी आमदनी में वृद्धि हुई है और समाज में उनकी पहचान भी मजबूत हुई है। योजना से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि पहले उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था, लेकिन अब वे अपनी कमाई से घर चलाने और परिवार की जरूरतें पूरी करने में सक्षम हैं।
नीमच जिले के ग्राम सरवानियाबोर निवासी रागिनी कुंवर राजपूत किसान सहेली स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि एनआरएलएम से जुड़ने के बाद उन्हें आरएफ, सीआईएफ और सीसीएल के माध्यम से आर्थिक सहायता मिली। शुरुआत में उन्होंने कपड़ों की छोटी दुकान खोली। जब इस व्यवसाय में लाभ होने लगा, तो उन्होंने पत्तल-दोने बनाने की मशीन खरीदी और नया रोजगार शुरू किया। मशीन के माध्यम से धीरे-धीरे उनका काम बढ़ा और वे आत्मनिर्भर बन गईं। इसके बाद उन्होंने गांव में अन्य स्व-सहायता समूहों का गठन करने और महिलाओं को योजना से जोड़ने का प्रयास किया। इस पहल से गांव की दूसरी महिलाओं की आर्थिक स्थिति में भी सुधार हुआ है।
रागिनी ने कहा कि योजना से जुड़ने से पहले वह एक साधारण गृहिणी थीं। गांव में रहने के कारण बाहर निकलने और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने की सीमाएं थीं। एनआरएलएम से जुड़ने पर उन्हें सरकारी योजनाओं की जानकारी मिली और उन्होंने धीरे-धीरे अपना काम शुरू किया। आज उनकी गांव में अलग पहचान है और वे लखपति दीदी योजना के अंतर्गत सर्वे का काम भी करती हैं। उन्होंने बताया कि उनके समूह को छह लाख रुपए तक का ऋण स्वीकृत हो चुका है। रागिनी ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एनआरएलएम और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार जताया।
सरवानियाबोर की ही मोनिका कुंवर नर्मदा स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले वह गृहिणी थीं और उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर थी। समूह से जुड़ने के बाद उन्हें रोजगार का अवसर मिला, जिससे उनकी गृहस्थी और परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ। मोनिका ने एनआरएलएम और प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि समूह से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया है। उन्होंने दावा किया कि पहले आर्थिक परेशानियां अधिक थीं, लेकिन अब स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गई है।
ग्राम पंचायत कराड़िया महाराज की निवासी दीपिका बागड़ी ने बताया कि वह वर्ष 2020 में स्व-सहायता समूह से जुड़ी थीं। उनके समूह का नाम खाटूश्याम है, जिसमें 13 महिलाएं शामिल हैं। जब गांव में एनआरएलएम के अधिकारी आए, तब समूह का गठन हुआ। उस समय गांव में केवल चार-पांच समूह ही सक्रिय थे। शुरुआत में समूह की बचत छोटी थी और 13 महिलाओं के नाम पर कुल 13 हजार रुपए की आरएफ राशि मिली थी। इसके बाद सीसीएल के माध्यम से पहले एक लाख, फिर दो लाख, पांच लाख और नौ लाख रुपए तक का ऋण मिला। अब ऋण की राशि बढ़कर 12 लाख रुपए तक पहुंच गई है। इस आर्थिक सहायता से महिलाओं ने अपने काम का विस्तार किया।
उन्होंने बताया कि समूह को नौ लाख रुपए का ऋण मिला था, जिसे जरूरतमंद महिलाओं में बांटा गया। इसके बाद एक लाख रुपए का ऋण लेकर डेयरी फार्म शुरू किया गया। इससे पहले मिले ऋण से पशु आहार का व्यवसाय भी शुरू किया गया था। दीपिका ने कहा कि योजना से महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। पहले गांव में पांच समूह थे, जबकि अब पूरी पंचायत में 36 समूह सक्रिय हैं। उन्होंने इस योजना को महिलाओं के लिए लाभकारी बताते हुए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया।
कराड़िया महाराज की निवासी रंजना कुंवर राणावत एनआरएलएम के अंतर्गत शिव शक्ति स्व-सहायता समूह से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में उनके समूह को छह लाख रुपए का ऋण मिला था, जिसे समूह के सभी 10 सदस्यों में बांटा गया। अपनी हिस्सेदारी से उन्होंने कॉस्मेटिक सामान, बच्चों के कपड़े, महिलाओं के उपयोग की वस्तुएं और जनरल स्टोर का व्यवसाय शुरू किया। रंजना ने बताया कि इस कारोबार से अब वह हर महीने 20 से 25 हजार रुपए कमा रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले वह केवल घर का काम संभालती थीं और उनके पास अपनी कमाई का कोई साधन नहीं था। कारोबार शुरू करने के लिए पूंजी की कमी सबसे बड़ी बाधा थी, लेकिन समूह के माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने के बाद उन्होंने अपना काम शुरू किया।
उन्होंने कहा कि पहले 500 से 1,000 रुपए खर्च करने से पहले भी कई बार सोचना पड़ता था, लेकिन अब उनके पास अपना व्यवसाय और नियमित आमदनी है। इससे वह परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ आर्थिक सहयोग भी दे पा रही हैं। रंजना ने प्रधानमंत्री और स्व-सहायता समूह के प्रति आभार जताते हुए कहा कि इस योजना ने उनके जैसी कई महिलाओं को रोजगार की नई राह दिखाई है।
कराड़िया महाराज की ओमकारी साल्वी ने बताया कि एनआरएलएम स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया। शुरुआत में उन्हें समूह से 30 हजार रुपए और फिर 60 हजार रुपए की सहायता मिली। अब उनके समूह को छह लाख रुपए का ऋण स्वीकृत हो रहा है, जिससे वह अपने कारोबार को आगे बढ़ाने की योजना बना रही हैं। ओमकारी ने किराना, मनिहारी यानी चूड़ियों, कपड़ों और जूते-चप्पल की थोक दुकान शुरू की है। इसके साथ ही उन्होंने एनआरएलएम के माध्यम से सिलाई का प्रशिक्षण भी लिया और अब सिलाई का काम भी करती हैं। उन्होंने बताया कि समूह से जुड़ने से पहले वह गृहिणी थीं और स्कूल में काम करती थीं। योजना से जुड़ने के बाद उन्होंने नए कौशल सीखे और अपना व्यवसाय शुरू किया, जिससे आमदनी बढ़ी तथा परिवार को आर्थिक सहारा मिला।
ओमकारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया है।
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