विजय मर्चेंट भारत के 'डॉन ब्रैडमैन', जिनकी तकनीक के कायल थे 'अंग्रेज'

नई दिल्ली, 26 अक्टूबर (आईएएनएस)। भारतीय क्रिकेट इतिहास में विजय मर्चेंट का नाम महान बल्लेबाजों में शुमार है, जिन्हें उनकी शानदार बल्लेबाजी तकनीक के कारण भारत का 'डॉन ब्रैडमैन' कहा गया। उनकी बल्लेबाजी इतनी बेहतरीन थी कि भारतीय ही नहीं, विदेशी खिलाड़ी भी उनके फैन थे।
विजय माधवजी मर्चेंट का जन्म 12 अक्टूबर 1911 को मुंबई में हुआ था। वह एक व्यापारी परिवार से ताल्लुक रखते थे। बचपन में उनका नाम 'विजय ठाकरसे' था। एक बार उनके इंग्लिश टीचर ने पिता के काम के बारे में पूछा, तो उन्होंने बताया कि वे 'मर्चेंट' यानी व्यापारी हैं। इस गलतफहमी के कारण उनका नाम 'विजय मर्चेंट' पड़ गया।
विजय मर्चेंट ने घरेलू क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया और 22 साल की उम्र में भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाई। हालांकि, वह भारत के शुरुआती टेस्ट मैचों में खेल सकते थे, लेकिन देशभक्ति की भावना और महात्मा गांधी के विचारों से प्रभावित होकर उन्होंने उस समय खेलने से इनकार कर दिया था। दिसंबर 1933 में उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ मुंबई में अपना पहला टेस्ट मैच खेला। इस मुकाबले में उन्होंने 23 और 30 रन बनाए।
मर्चेंट का अंतरराष्ट्रीय करियर करीब 18 साल लंबा रहा, लेकिन द्वितीय विश्व युद्ध के कारण वह करीब 10 साल क्रिकेट मैदान से दूर रहे। वह भारत के लिए केवल 10 टेस्ट मैच खेल सके, जिनमें 47.72 की औसत से 859 रन बनाए। इस दौरान उन्होंने तीन शतक और तीन अर्धशतक लगाए।
घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन बेहद शानदार रहा। उन्होंने 150 प्रथम श्रेणी मुकाबलों की 234 पारियों में 71.64 की औसत से 13,470 रन बनाए। उनके नाम 45 शतक और 52 अर्धशतक दर्ज हैं। प्रथम श्रेणी क्रिकेट में सर्वाधिक बल्लेबाजी औसत के मामले में वह डॉन ब्रैडमैन के बाद दूसरे स्थान पर रहे।
विजय मर्चेंट अपनी शानदार तकनीक, लेट कट और हुक शॉट के लिए मशहूर थे। उनके खेल से प्रभावित होकर अंग्रेज खिलाड़ी सीबी फ्रे ने भी उनकी तारीफ की थी। साल 1937 में उन्हें 'विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर' चुना गया।
मर्चेंट ने अपने अंतिम दो टेस्ट मैचों में शतक लगाए। अगस्त 1946 में इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने 128 रन बनाए, जबकि नवंबर 1951 में दिल्ली में 154 रन की पारी खेली। कंधे की चोट के कारण उन्होंने 1951 में क्रिकेट से संन्यास ले लिया। 27 अक्टूबर 1987 को 76 वर्ष की उम्र में दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया। उनकी उपलब्धियां आज भी भारतीय क्रिकेट के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
इस महानतम बल्लेबाज के सम्मान में विजय मर्चेंट ट्रॉफी की शुरुआत 1985-86 में हुई, जो भारत में खेली जाने वाली एक प्रमुख अंडर-16 घरेलू क्रिकेट प्रतियोगिता है।
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