एनएचआरसी ने नागरिकों की कथित लक्षित हत्याओं पर जम्मू-कश्मीर पुलिस से मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली, 25 मार्च (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने जम्मू-कश्मीर में हिंदू नागरिकों और अन्य कमजोर समुदायों के खिलाफ बार-बार हो रही हिंसा और हत्याओं की शिकायत का संज्ञान लिया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन मामलों की जांच और अभियोजन में पारदर्शिता की कमी है।
एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को नोटिस जारी किया है। नोटिस में निर्देश दिया गया है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच की जाए और दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट (एटीआर) आयोग को प्रस्तुत की जाए।
यह शिकायत 'एंटी टेररिज्म ग्लोबल फ्रंट' (एटीजीएफ) के अध्यक्ष और अधिवक्ता विनीत जिंदल ने दायर की थी। उन्होंने शिकायत में इस बात पर चिंता जताई कि हिंसा के कई मामलों में एक ही तरह के पैटर्न बार-बार देखे जा रहे हैं और जांच तथा अभियोजन प्रक्रियाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है।
शिकायत में अतीत की कुछ महत्वपूर्ण घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। इनमें नादिमार्ग नरसंहार शामिल है, जिसमें 24 कश्मीरी पंडितों की हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा 1998 का वंधामा नरसंहार, जिसमें 23 लोगों की जान गई थी, और अमरनाथ यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों पर हुए हमले भी शामिल हैं। शिकायत में वर्ष 2000 और 2017 की उन घटनाओं का भी जिक्र है, जिनमें कई लोगों की जानें गई थीं।
एनएचआरसी ने इस मामले में स्पष्ट किया कि आयोग इस तरह की गंभीर हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की शिकायतों को गंभीरता से लेता है। आयोग ने पुलिस महानिदेशक से कहा है कि जांच प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता के साथ हो और सभी मामलों में दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।
इस कदम से यह संकेत मिलता है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग जम्मू-कश्मीर में कमजोर समुदायों की सुरक्षा और न्याय सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय भूमिका निभा रहा है। आयोग की कार्रवाई का उद्देश्य उन घटनाओं की जिम्मेदारी तय करना और भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकना है।
एक शिकायत में आरोप लगाया गया है कि जम्मू-कश्मीर में जांच, गिरफ्तारियों और मुकदमों में पारदर्शिता की कमी के कारण कई मामले अनसुलझे रह गए हैं। इससे नागरिकों के संविधान द्वारा गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है, जिनमें जीवन का अधिकार (अनुच्छेद 21), समानता का अधिकार (अनुच्छेद 14) और धर्म की स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) शामिल हैं।
शिकायतकर्ता ने एनएचआरसी से हस्तक्षेप की मांग की और आरोपों की विस्तृत जांच रिपोर्ट, एफआईआर, गिरफ्तारियों और मुकदमों की केस-वार स्थिति उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। उन्होंने निवारक उपाय लागू करने, कमजोर समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा और पुनर्वास की अपील भी की।
इस शिकायत पर कार्रवाई करते हुए एनएचआरसी ने जम्मू और कश्मीर पुलिस को निर्देश दिया कि आरोपों की जांच की जाए और निर्धारित समय के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट आयोग को प्रस्तुत की जाए। आयोग ने कहा कि रिपोर्ट में सभी जांच के विवरण, घटनाओं की जानकारी और उपलब्ध साक्ष्य शामिल होने चाहिए।
एनएचआरसी ने आगे कहा कि इस मामले से संबंधित सभी पत्राचार एचआरसी नेट पोर्टल के माध्यम से प्रस्तुत किए जा सकते हैं। इसमें जांच से संबंधित दस्तावेज, केस-वार जानकारी और अन्य सहायक सामग्री भी शामिल हो सकती है।
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Created On :   25 March 2026 6:10 PM IST












