ओडिशा के मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की, एकीकृत विज्ञान और प्रौद्योगिकी पहल के संबंध में चर्चा

ओडिशा के मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा ने डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की, एकीकृत विज्ञान और प्रौद्योगिकी पहल के संबंध में चर्चा
केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ओडिशा के लिए ऐसी एकीकृत रूपरेखा तैयार की है जो भारत सरकार के 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' के प्रस्ताव, राज्य के समृद्ध समुद्री और तटीय संसाधनों, जैव प्रौद्योगिकी के अनुकूल परिवेश, अंतरिक्ष क्षमताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के नेटवर्क को एक साथ लाएगी।

नई दिल्‍ली, 11 अगस्‍त (आईएएनएस)। केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने ओडिशा के लिए ऐसी एकीकृत रूपरेखा तैयार की है जो भारत सरकार के 'रेयर अर्थ कॉरिडोर' के प्रस्ताव, राज्य के समृद्ध समुद्री और तटीय संसाधनों, जैव प्रौद्योगिकी के अनुकूल परिवेश, अंतरिक्ष क्षमताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के नेटवर्क को एक साथ लाएगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने ओडिशा के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री कृष्ण चंद्र पात्रा के साथ इस रूपरेखा पर चर्चा की। कृष्ण चंद्र पात्रा ने उनसे मुलाकात की और राज्य की विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ी प्राथमिकताओं से संबंधित प्रस्तावों की श्रृंखला प्रस्तुत की।

चर्चाओं में समुद्री जैव प्रौद्योगिकी का विस्तार, जीवन विज्ञान के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना, ओडिशा के तटीय और खनिज संसाधनों का अधिक उपयोग, अंतरिक्ष अनुप्रयोग और विनिर्माण, पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों की खोज, वैज्ञानिक अवसंरचना और राष्ट्रीय समुद्री-पर्यावरण पहल में तटीय जिलों की भागीदारी पर विचार शामिल था।

बैठक में ओडिशा सरकार से अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि के प्रावधान के साथ जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भुवनेश्वर से संबंधित 'इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज', भुवनेश्वर के विस्तार को अंतिम रूप दिया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पूर्वी तटीय क्षेत्र भारत के उभरते परमाणु और समुद्री रोडमैप में बहुत बड़ी भूमिका निभा सकता है और ओडिशा केंद्रीय वैज्ञानिक संस्थानों और राज्य सरकार को शामिल करने वाले समन्वित प्रयासों के माध्यम से योगदान करने के लिए अच्छी तरह से तैयार है। यह दृष्टिकोण व्यक्तिगत संस्थागत पहलों से समुद्री संसाधनों, महत्वपूर्ण खनिजों, जीवन विज्ञान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और प्रौद्योगिकी के नेतृत्व वाले आर्थिक विकास में फैले तथा जुड़े हुए अनुकूल परिवेश की ओर बढ़ने का प्रयास करता है।

इस दौरान ओडिशा समुद्री जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और नवाचार गलियारे (ओएमबीआरआईसी) के संबंध में भी चर्चा हुई जिसे राज्य में अग्रणी शैक्षणिक और अनुसंधान संस्थानों को एक साथ लाने वाले सहयोगी मंच के रूप में विकसित किया जा रहा है।

ओएमबीआरआईसी ने पहले ही आईआईटी भुवनेश्वर, बरहमपुर विश्वविद्यालय, फकीर मोहन विश्वविद्यालय, एनआईटी राउरकेला, आईआईएसईआर बरहमपुर और इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज (आईएलएस), भुवनेश्वर के साथ साझेदारी स्थापित की है। अगले चरण में इस संस्थागत नेटवर्क को पृथ्वी विज्ञान, सीएसआईआर और जैव प्रौद्योगिकी विभाग के साथ अधिक निकटता से सुव्यवस्थित करने का प्रयास किया जाएगा जिससे ओडिशा के समुद्री संसाधनों को उन्नत अनुसंधान, जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों और औद्योगिक नवाचार से जोड़ा जा सके।

बैठक में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग से संबंधित 'इंस्टीट्यूट ऑफ लाइफ साइंसेज', भुवनेश्वर के विस्तार पर भी आगे चर्चा हुई, जिसमें राज्य सरकार से इसके भविष्य के विकास का समर्थन करने के लिए अतिरिक्त 50 एकड़ भूमि के प्रावधान पर बातचीत शामिल हैं।

संस्था विस्तारित क्षमता के साथ जीवन विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में अनुसंधान और जैव-ई3 ढांचे, अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी से जुड़ी पहलों के लिए मजबूत आधार प्रदान कर सकती है। व्यापक तटरेखा, समुद्री जैव विविधता और संसाधन आधार को देखते हुए यह ओडिशा के लिए विशेष महत्व रखता है। राज्य का समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र जैव-संसाधनों, स्वास्थ्य, भोजन, सामग्री और पर्यावरणीय समाधानों जैसे क्षेत्रों में जैव प्रौद्योगिकी अनुप्रयोगों के लिए अवसर प्रदान कर सकता है।

समुद्री जैव प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान को जोड़ने के प्रस्ताव का उद्देश्य ओडिशा के तटीय संसाधनों की वैज्ञानिक समझ और सतत उपयोग को मजबूत करना भी है। यह दृष्टिकोण समुद्री विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी और खनिज-संसाधन अनुसंधान में विशेषज्ञता को एक साथ लाएगा जिससे संयुक्त परियोजनाओं और प्रौद्योगिकी विकास के लिए अधिक संभावनाएं पैदा होंगी।

ओडिशा में अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र चर्चा का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा था। बैठक में इसरो के साथ राज्य की अंतरिक्ष क्षमताओं को घनिष्ठ रूप से जोड़े जाने की संभावनाओं का पता लगाया गया जिसमें पीपीपी मोड में अंतरिक्ष अनुसंधान और विनिर्माण केंद्र विकसित करने की संभावना शामिल है। इस तरह का परिवेश सरकारी संस्थानों, राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसियों, अनुसंधान संगठनों और उद्योग को एक साथ ला सकता है जिससे न केवल अंतरिक्ष अनुप्रयोगों के लिए बल्कि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और विनिर्माण के लिए भी अवसर पैदा हो सकते हैं।

इन चर्चाओं में उभरते रेयर अर्थ इकोसिस्टम में ओडिशा की भूमिका पर भी बात हुई। केंद्रीय बजट 2026-27 में खनन, प्रसंस्करण, अनुसंधान और विनिर्माण पर ध्यान देने के साथ ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में समर्पित रेयर अर्थ कॉरिडोर की घोषणा की गई है। इस पहल का उद्देश्य पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों के लिए एकीकृत घरेलू मूल्य श्रृंखला का निर्माण करना और उन्नत सामग्रियों तथा रणनीतिक क्षेत्रों में भारत की क्षमताओं को मजबूत करना है।

इस संदर्भ में, ओडिशा के तटीय खनिज संसाधन और इसकी वर्तमान वैज्ञानिक और संस्थागत क्षमताएं आगे की खोज और प्रौद्योगिकी विकास के लिए मजबूत आधार प्रदान करती हैं। बैठक में परमाणु खनिजों, उन्नत सामग्रियों और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों में बड़ी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ इन प्रयासों को जोड़ते हुए पृथ्वी के दुर्लभ तत्वों की खोज और संबंधित वैज्ञानिक क्षमताओं से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने पर चर्चा की गई। ओडिशा की रेयर-अर्थ इकोसिस्टम में पहले से ही महत्वपूर्ण उपस्थिति है जिसमें भारत की रेयर-अर्थ प्रोसेसिंग गतिविधियों से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं।

इस दौरान, डीप ओशन मिशन और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन में उभरते अवसर भी व्यापक तटीय विकास एजेंडे का हिस्सा बने। ओडिशा की लंबी तटरेखा और समुद्री संसाधन का आधार महासागर विज्ञान, मत्स्य पालन, समुद्री प्रौद्योगिकी और तटीय आर्थिक गतिविधि को एकीकृत करने के लिए महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करते हैं। राज्य ने हाल ही में अपने ओडिशा डीप सी फिशिंग मिशन (2026-2036) को आगे बढ़ाया है। इसका उद्देश्य अपतटीय और गहरे समुद्र में मत्स्य पालन की क्षमता को बाहर लाना और समुद्री अर्थव्यवस्था के आसपास सुदृढ़ मूल्य श्रृंखला विकसित करना है।

ओडिशा के विस्तारित विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनुकूल परिवेश के अंतर्गत लोगों के लिए महत्वपूर्ण सार्वजनिक घटक के रूप में राज्य में प्रस्तावित साइंस सिटी पर भी चर्चा की गई। यह पहल वैज्ञानिक जागरूकता, नवाचार, प्रायोगिक अनुभव पर आधारित शिक्षा तथा विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ युवाओं के अधिक जुड़ाव के लिए मंच प्रदान कर सकती है जो राज्य भर में अनुसंधान के लिए विकसित की जा रही अवसंरचना का पूरक है।

चर्चाओं में सहयोगी परियोजनाओं के लिए ओडिशा के केंद्रीय और राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों के मजबूत समूह का लाभ उठाने की संभावना पर भी विचार किया गया। समुद्री विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान, जैव प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों में काम करने वाले संस्थानों के बीच अधिक समन्वय से राज्य में अधिक एकीकृत अनुसंधान और नवाचार के अनुकूल परिवेश के निर्माण में सहायता मिल सकती है।

बैठक में आगामी 'स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर' अभियान में ओडिशा की भागीदारी पर चर्चा भी शामिल थी। इस पहल में भाग लेने वाले राज्य के कई तटीय जिलों के साथ जन भागीदारी, तटीय स्वच्छता गतिविधियों और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा के बारे में व्यापक जागरूकता की सुविधा प्रदान करने के लिए जिला प्रशासन के साथ समन्वय को मजबूत किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह और कृष्ण चंद्र पात्रा ने इन पहलों को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर केंद्र-राज्य समन्वय के महत्व पर सहमति व्यक्त की। समुद्री संसाधनों, जैव प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिजों, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक अवसंरचना को जोड़ने का प्रस्ताव ओडिशा को पूर्वी तटीय क्षेत्र के लिए एक विशिष्ट विज्ञान-आधारित विकास मॉडल बनाने का अवसर प्रदान करेगा जबकि भारत के तकनीकी आत्मनिर्भरता और अपने प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग के व्यापक उद्देश्यों में योगदान देगा।

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Created On :   11 Aug 2026 8:28 PM IST

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