ओवैसी ने एमईए के बयान पर जताई आपत्ति, कहा- पासपोर्ट को नागरिकता से अलग मानना अनुचित
हैदराबाद, 25 जून (आईएएनएस)। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भारतीय विदेश मंत्रालय (एमईए) के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिसमें कहा गया था कि पासपोर्ट केवल एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि सरकार अपने हिसाब से तय करना चाहती है कि कौन देश का नागरिक है और कौन नहीं।
ओवैसी ने भारतीय विदेश मंत्रालय के बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि पासपोर्ट आखिर मिलता किसे है? उन्होंने कहा कि भारत का पासपोर्ट केवल भारतीय नागरिकों को ही जारी किया जाता है और किसी अन्य देश के नागरिक को यह नहीं दिया जा सकता। पासपोर्ट जारी करने से पहले विस्तृत पुलिस सत्यापन किया जाता है और सभी आवश्यक जांचों के बाद ही यह दस्तावेज दिया जाता है। ऐसे में इसे नागरिकता से पूरी तरह अलग मानना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि पासपोर्ट अधिनियम की विभिन्न धाराओं में यह स्पष्ट प्रावधान है कि बिना नागरिकता के किसी व्यक्ति को पासपोर्ट जारी नहीं किया जा सकता, सिवाय कुछ विशेष परिस्थितियों के जिनमें केंद्र सरकार की अनुमति आवश्यक होती है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि केवल नागरिकता प्रमाण पत्र को ही नागरिकता का एकमात्र प्रमाण माना जाएगा, तो समस्या पैदा हो सकती है, क्योंकि भारत में बड़ी आबादी के पास अलग से नागरिकता प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। देश में अधिकतर लोग जन्म प्रमाण पत्र, आधार कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट जैसे दस्तावेजों पर निर्भर रहते हैं।
एआईएमआईएम प्रमुख ने कहा कि भारत में कई पीढ़ियों से लोग यहां रह रहे हैं और उनके पास अलग से कोई नागरिकता दस्तावेज नहीं है। ऐसे में यदि इन सभी दस्तावेजों को नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा, तो इससे आम लोगों के लिए जटिल स्थिति पैदा हो सकती है। सरकार अब यह करना चाहती है कि वो किसी को भी उठकर कह दे कि ये भारत का नागरिक नहीं है। हम बताएंगे कि कौन भारत का नागरिक है और कौन नहीं। ये सही नहीं है। सरकार बेवजह पासपोर्ट को लेकर तकलीफ पैदा कर रही है।
इस दौरान ओवैसी ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सामने आए कथित बंधुआ मजदूरी के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत निंदनीय और अमानवीय घटना है। आज के समय में किसी गरीब व्यक्ति को बंधक बनाकर रखना, उससे जबरन काम कराना, उसे भूखा रखना और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना गंभीर अपराध है। जब राज्य सरकार को यह पता चल जाता है कि किसी की शादी में क्या पक रहा है, तो ऐसे गंभीर मामलों की जानकारी सरकार को क्यों नहीं होती? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नजर केवल एक ही समुदाय पर ही रहती है, जबकि अन्य गंभीर सामाजिक अपराधों की अनदेखी हो जाती है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी हो या गरीबों को बंधक बनाकर उनसे मजदूरी कराई जा रही है और सरकार को इसकी खबर तक नहीं होती है।
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Created On :   25 Jun 2026 9:55 PM IST












