पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी बिल पेश होने से पहले मंत्री बोले- 'उम्मीद है जनता दिल से करेगी स्वागत'

पश्चिम बंगाल विधानसभा में यूसीसी बिल पेश होने से पहले मंत्री बोले- उम्मीद है जनता दिल से करेगी स्वागत
पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को पेश होने वाले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर दिलीप घोष समेत राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने प्रतिक्रिया दी है। मौमिता बिस्वास मिश्रा ने भरोसा जताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल का हर आम नागरिक पूरे दिल से इसका स्वागत करेगा।

कोलकाता, 28 जून (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में सोमवार को पेश होने वाले समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पर दिलीप घोष समेत राज्य सरकार के कई मंत्रियों ने प्रतिक्रिया दी है। मौमिता बिस्वास मिश्रा ने भरोसा जताते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल का हर आम नागरिक पूरे दिल से इसका स्वागत करेगा।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री अर्जुन सिंह ने पटना में मीडिया से बात करते हुए यूसीसी विधेयक को लेकर कहा, "पश्चिम बंगाल में यूसीसी लागू होने जा रहा है। हम सोमवार को विधानसभा में बिल लाएंगे।"

यूसीसी बिल पर बंगाल सरकार में मंत्री दिलीप घोष ने भी सवालों का जवाब दिया। कोलकाता में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, "यूसीसी बिल के लिए नोटिस है। यूसीसी बहुत से राज्यों में लागू हुआ और यहां भी प्रक्रिया शुरू हुई है।"

वहीं, मंत्री मौमिता बिस्वास मिश्रा ने कहा, "राज्य में यूसीसी लागू होने जा रहा है। मुझे पूरा भरोसा है कि पश्चिम बंगाल का हर आम नागरिक पूरे दिल से इसका स्वागत करेगा।"

गौरतलब है कि यूसीसी के बाद पश्चिम बंगाल धर्म आधारित व्यक्तिगत कानूनों को एक एकीकृत नागरिक कानून से बदलने वाला चौथा भारतीय राज्य होगा। इससे पहले, उत्तराखंड, गुजरात और असम यूसीसी को अपना चुके हैं।

पश्चिम बंगाल भाजपा के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने शनिवार को अपने एक बयान में कहा कि भारत में यूसीसी पर भाजपा का रुख लंबे समय से स्पष्ट रहा है। उन्होंने कहा कि यह हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी के चुनावी घोषणापत्र व राजनीतिक वादे का हिस्सा था और इसे छिपाया या दबाया नहीं गया था।

उन्होंने कहा, "भाजपा का मानना ​​है कि पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता जरूरी है क्योंकि कानून के तहत सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कर्तव्य सुनिश्चित किए जाने चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे नागरिक मामलों में धर्म पर आधारित अलग-अलग पर्सनल लॉ के बजाय एक समान नागरिक ढांचा देश की एकता, न्याय और संवैधानिक समानता के आदर्शों को और मजबूत कर सकता है।

सामिक भट्टाचार्य ने आम लोगों के मन में इस प्रस्तावित बिल को लेकर मौजूद शंकाओं को भी दूर किया। भट्टाचार्य ने साफ किया कि किसी भी हाल में अनुसूचित जनजातियां इस यूसीसी बिल के दायरे में नहीं आएंगी।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   28 Jun 2026 1:26 PM IST

Tags

Next Story