'पहले नोटिस का जवाब नहीं, दूसरे का दे रहे हैं', आदित्य ठाकरे के हलफनामे पर नीलेश ओझा ने उठाए सवाल

पहले नोटिस का जवाब नहीं, दूसरे का दे रहे हैं, आदित्य ठाकरे के हलफनामे पर नीलेश ओझा ने उठाए सवाल
दिशा सालियान मामले में दायर मानहानि के नोटिस पर आदित्य ठाकरे की ओर से आए जवाब को सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने 'भ्रामक और तथ्यहीन' करार दिया। ओझा ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद पहले नोटिस पर चुप्पी और अब दूसरे नोटिस पर गोलमोल जवाब कई नए सवाल खड़े करता है। उन्होंने ड्रग्स कारोबार के आरोपों से लेकर मोबाइल टावर लोकेशन और हलफनामे में दी गई निजी जानकारी तक पर ठाकरे से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की है।

मुंबई, 23 सितंबर (आईएएनएस)। दिशा सालियान मामले में दायर मानहानि के नोटिस पर आदित्य ठाकरे की ओर से आए जवाब को सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने 'भ्रामक और तथ्यहीन' करार दिया। ओझा ने कहा कि हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज होने के बाद पहले नोटिस पर चुप्पी और अब दूसरे नोटिस पर गोलमोल जवाब कई नए सवाल खड़े करता है। उन्होंने ड्रग्स कारोबार के आरोपों से लेकर मोबाइल टावर लोकेशन और हलफनामे में दी गई निजी जानकारी तक पर ठाकरे से सार्वजनिक स्पष्टीकरण की मांग की है।

दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान के वकील नीलेश ओझा ने कहा, "पहले नोटिस का जवाब वह नहीं दे पाए क्योंकि हाईकोर्ट ने उनकी पूरी याचिका खारिज कर दी थी, इसलिए उनके पास जवाब देने के लिए कुछ था ही नहीं। आश्चर्य की बात है कि पहले नोटिस का जवाब नहीं दे रहे हैं और दूसरे नोटिस का जवाब दे रहे हैं। दूसरे नोटिस का जवाब अभी आया है और पूरे जवाब में वही स्थिति बन गई है, जो हाईकोर्ट ने मालवणी पुलिस के बारे में कहा था कि जवाब कई और सवाल खड़े करता है।"

उन्होंने कहा, "उनका जवाब है कि मैं दिशा को नहीं जानता था; मेरी पोस्ट सतीश सालियान को बदनाम करने के लिए नहीं थी। जो लोग राजनीतिक रूप से प्रेरित होकर इस मामले को लेकर मुझे बदनाम कर रहे थे, मेरी पोस्ट उनसे संबंधित थी। मुझे अपना बचाव करने का अधिकार है।"

नीलेश ओझा ने कहा कि उन्हें बिल्कुल अधिकार है, लेकिन उनके पास सबूत होना चाहिए। उन्होंने किसी भी बात का जवाब नहीं दिया है; उनका जवाब सिर्फ शब्दों की बाजीगरी है।

उन्होंने कहा, "आपके माध्यम से मैं उनसे फिर एक बार सवाल पूछ रहा हूं कि आप कह रहे हैं कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित केस है। आपने इसी आधार पर एफआईआर न हो और सीबीआई को आदेश न दिया जाए, ऐसी आपत्ति हाईकोर्ट में ली थी। हाईकोर्ट ने आपकी आपत्ति को नहीं माना और हमारी बात में दम पाया, इसलिए एफआईआर का आदेश दिया। दस ग्राउंड के ब्योरे और पैरा 38 में पूरा लिखा है कि मुंबई पुलिस ने जब आपकी सरकार थी तब कैसे फर्जीवाड़ा किया और बाद में अब की पुलिस ने भी उसमें कवर-अप करने में कैसे मदद की।"

निलेश ओझा ने आगे कहा कि दूसरी बात, आप आज तक यह क्यों नहीं बता रहे हैं कि उस दिन आपकी मोबाइल टावर लोकेशन कहां थी? हम पहले दिन से ही यह कह रहे हैं। हमने तो यह सवाल पूछा ही है, अब तो आपसे राजनीतिक रूप से संबंधित नहीं होने वाले थर्ड पर्सन जैसे प्रकाश अंबेडकर जी ने भी पूछा है कि आप बता दीजिए कि उस दिन आप कहां थे। आप मंत्री हैं, आपके साथ सरकारी बॉडीगार्ड रहते हैं तो उस समय आपका पूरा मूवमेंट रजिस्टर वगैरह रहता है, तो आप अपनी मोबाइल टावर लोकेशन बता दीजिए।

उन्होंने आगे कहा कि उसका भी कोई जवाब नहीं है। तीसरी बात हमारे एफिडेविट में भी थी और 2025 में आपके वकील को जो नोटिस भेजी थी, उसमें भी लिखा था कि आप ड्रग्स का बिजनेस करते हैं; यह बात नारकोटिक्स ब्यूरो के क्राइम नंबर 15/2020 में सामने आई है। इस पर आज तक कोई जवाब नहीं है। आपके रिप्लाई में भी नहीं है। विषय ड्रग्स का बिजनेस नहीं है।

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Created On :   24 Sept 2026 12:03 AM IST

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