भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, सोना-चांदी 3 प्रतिशत तक फिसले

भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से कीमती धातुओं में बड़ी गिरावट, सोना-चांदी 3 प्रतिशत तक फिसले
भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग कमजोर होने से हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को लगातार तीसरे सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

मुंबई, 19 जून (आईएएनएस)। भू-राजनीतिक तनाव में कमी आने से सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) की मांग कमजोर होने से हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन शुक्रवार को लगातार तीसरे सत्र में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर अगस्त डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद 1,49,309 रुपए से 2.3 प्रतिशत गिरकर 1,45,800 रुपए के दिन के निम्नतम स्तर पहुंच गया। यह सोना आज 1,47,175 रुपए प्रति 10 ग्राम पर खुला।

हालांकि शुरुआती कारोबार में खबर लिखे जाने तक (सुबह 10.29 बजे के करीब) पीली धातु 3,507 रुपए या 2.35 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,45,802 रुपए प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रही थी।

वहीं, जुलाई डिलीवरी वाली चांदी 8,515 रुपए यानी 3.58 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,29,057 रुपए प्रति किलोग्राम पर ट्रेड करती नजर आई।

सफेद धातु ने शुरुआती कारोबार में अपने पिछले बंद 2,37,572 रुपए से 5,201 रुपए या 2.1 प्रतिशत गिरकर 2,32,371 रुपए पर खुला और 3.6 प्रतिशत गिरकर 2,28,800 रुपए के दिन के निचले स्तर तक पहुंच गया।

इस बीच, कॉमेक्स गोल्ड 2.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 4,141 डॉलर के लेवल पर ट्रेड करता नजर आया, जबकि कॉमेक्स सिल्वर 4.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63.45 के लेवल पर कमजोर रुख के साथ ट्रेड करता नजर आया।

एक मार्केट एक्सपर्ट के अनुसार, जनवरी में सोने की कीमत 5,595 डॉलर के सबसे ऊंचे स्तर पर थी; तब से इसमें लगभग 24 प्रतिशत की गिरावट आई है, और शुक्रवार को अमेरिकी फेड की वजह से हुई बिकवाली ने इस गिरावट को और बढ़ा दिया है। इसके कारणों में तेल की कीमतों में उछाल से महंगाई का डर, ब्याज दरों में बढ़ोतरी का माहौल, डॉलर का मजबूत होना और लीवरेज्ड पोजीशन (उधार लेकर लगाई गई रकम) का खत्म होना शामिल है। ये उतार-चढ़ाव समय-समय पर होने वाले बदलाव हैं, न कि कोई बुनियादी खराबी।

एक्सपर्ट ने आगे कहा कि इसके बावजूद, जो कोई भी पूरे भरोसे के साथ यह कह रहा है कि कीमत अब सबसे निचले स्तर पर है, वह सिर्फ अंदाजा लगा रहा है। हम बस इतना कह सकते हैं कि जो बुनियादी बातें हैं - जैसे ऐतिहासिक रूप से सबसे ज्यादा सरकारी कर्ज, सेंट्रल बैंक द्वारा लगातार सोना जमा करना, और रिजर्व करेंसी के टिके रहने पर उठते सवाल - उनमें कोई बदलाव नहीं आया है। यह सही समय है या कीमत और गिरेगी, यह कोई नहीं जानता।

लेकिन जिन निवेशकों का नजरिया 5 साल का है और जिन्होंने कीमती धातुओं (जैसे सोना) में कोई निवेश नहीं किया है, उन्हें कम से कम इस बारे में सोचना चाहिए।

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Created On :   19 Jun 2026 11:12 AM IST

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