पंजाब में बिगड़ी कानून व्यवस्था, 'आप' सरकार की नाकामी छिपा रहे मुख्यमंत्री विजय इंदर सिंगला

संगरूर, 4 नवंबर (आईएएनएस)। कांग्रेस नेता विजय इंदर सिंगला ने राहुल गांधी की संगरूर में 'इंसाफ रैली' और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहस की चुनौती देने वाले बयान पर टिप्पणी की।
पंजाब के संगरूर में कांग्रेस की 'इंसाफ रैली' पर कांग्रेस नेता विजय इंदर सिंगला ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "सभी को पंजाब के हालात के बारे में पता है। आज लोगों के घरों के दरवाजे तक नशा बिक रहा है और यह आसानी से मिल जाता है। सीमा पार से हथियार और ड्रग्स आ रहे हैं। सीमा किसके नियंत्रण में है? यह बीएसएफ के नियंत्रण में है, जिसके अधिकार क्षेत्र को भाजपा ने 15 से बढ़ाकर 50 किमी कर दिया है। आज पंजाब में हत्याएं हो रही हैं और अगर कोई गवाही देता है तो उसके परिवार को धमकी दी जाती है। पंजाब में बेरोजगारी बहुत बड़ा मुद्दा है। आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि हर घर में एक सरकारी नौकरी देंगे, लेकिन वह पूरा नहीं किया।"
विजय इंदर सिंगला ने कहा, "पंजाब में कानून-व्यवस्था बिगड़ी हुई है, ऐसे में यहां कोई व्यापारी निवेश नहीं करना चाहता। इंसाफ रैली 2027 के विधानसभा चुनाव की शुरुआत करेगी। आने वाले दिनों में पंजाब के लोग कांग्रेस की मजबूत सरकार बनाएंगे। कांग्रेस के शासनकाल में ड्रग्स माफियाओं पर बड़ी कार्रवाई की गई थी। पंजाब में आज कोई भी अपने आपको सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है।"
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने बयान दिया है कि चाहे राहुल गांधी आ जाएं या सोनिया गांधी, उससे कुछ नहीं होगा। पंजाब कांग्रेस में ही गुटबाजी है, पहले अपने नेताओं को तो संभालें। इस बयान पर विजय इंदर ने कहा, "मुख्यमंत्री अपनी पार्टी की नाकामी को छिपाने की कोशिश कर रहे हैं। तीन दिनों में आप के 3 विधायकों ने इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया है। इससे पहले 7 राज्यसभा सांसद आप छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। चुनाव में पता चल जाएगा कि आप किस स्थिति में पहुंच गई हैं। आज पंजाब में झूठा प्रचार हो रहा है।"
राहुल गांधी ने वीडियो जारी करके पीएम मोदी से डिबेट करने की मांग की है। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि डिबेट करने की जगह संसद है, वहां क्यों डिबेट नहीं करते?
सीतारमण के बयान पर कांग्रेस नेता ने कहा, "प्रधानमंत्री ने आज तक मीडिया से बातचीत नहीं की। वह सिर्फ मन की बात करते हैं। कई मुद्दों पर संसद में सत्ताधारी पार्टी बहस नहीं होने देती। ऐसे में संसद के बाहर बहस होगी तो देश की जनता को सरकार की योजनाओं की हकीकत पता चलेगी।"
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