राम, कृष्ण और शिव के संदेश ही भारत की एकता की आधारशिला सीएम योगी

राम, कृष्ण और शिव के संदेश ही भारत की एकता की आधारशिला सीएम योगी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राममंदिर परिसर में शिव मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करते हुए डॉ. राम मनोहर लोहिया का उल्लेख किया और कहा कि महापुरुषों को जातीय आधार पर बांटना ‘महापाप’ है। उन्होंने कहा कि राम, कृष्ण और शिव के संदेश ही भारत की एकता की आधारशिला हैं और इन्हें कमजोर करने का प्रयास समाज के लिए घातक है।

अयोध्या, 29 अप्रैल (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को राममंदिर परिसर में शिव मंदिर के शिखर पर ध्वजारोहण करते हुए डॉ. राम मनोहर लोहिया का उल्लेख किया और कहा कि महापुरुषों को जातीय आधार पर बांटना ‘महापाप’ है। उन्होंने कहा कि राम, कृष्ण और शिव के संदेश ही भारत की एकता की आधारशिला हैं और इन्हें कमजोर करने का प्रयास समाज के लिए घातक है।

मुख्यमंत्री ने रामजन्मभूमि मंदिर परिसर के परकोटे में स्थित शिव मंदिर के शिखर पर शाम करीब 5:45 बजे वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विधि-विधान से ध्वजारोहण किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में संत-महंत, विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति उसकी एकता में निहित है और इसे बनाए रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। देश के महापुरुषों ने समाज को जोड़ने का कार्य किया, लेकिन आज कुछ लोग उन्हें जातीय आधार पर विभाजित करने का प्रयास कर रहे हैं, जो गंभीर भूल है।

डॉ. लोहिया के विचारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब तक राम, कृष्ण और शिव के आदर्श समाज में जीवित रहेंगे, तब तक भारत को कोई विभाजित नहीं कर सकता। उन्होंने बिना नाम लिए राजनीतिक विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि वही लोग आज समाज में विभाजन की राजनीति कर रहे हैं।

सीएम ने आह्वान किया कि देश की 140 करोड़ जनता यदि एकजुट होकर आगे बढ़ेगी, तो दुनिया की कोई ताकत भारत के सामने टिक नहीं पाएगी। उन्होंने कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक विरासत के प्रति प्रतिबद्धता आवश्यक है।

उन्होंने श्रीरामजन्मभूमि आंदोलन को विश्व के अद्वितीय आंदोलनों में से एक बताते हुए कहा कि यह संघर्ष समाज के हर वर्ग की भागीदारी से संभव हुआ। 16वीं सदी से शुरू हुआ यह संघर्ष लंबे समय तक चला और अंततः न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से समाधान तक पहुंचा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जब उच्चतम न्यायालय ने श्रीरामजन्मभूमि के पक्ष में फैसला दिया, तब देश ने अभूतपूर्व शांति और संतोष का अनुभव किया। इसके बाद 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री द्वारा भूमि पूजन और 22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा के साथ यह ऐतिहासिक यात्रा पूर्ण हुई।

उन्होंने कहा कि अयोध्या ने दुनिया को संदेश दिया है कि लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प और एकजुटता से हर चुनौती को पार किया जा सकता है। “हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं”—यह संदेश अयोध्या से पूरे विश्व तक गया है।

कार्यक्रम से पहले मुख्यमंत्री ने हनुमानगढ़ी में दर्शन-पूजन किया, इसके बाद रामलला के दर्शन कर शिव मंदिर में अभिषेक किया। ध्वजारोहण से पूर्व आचार्यों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ ध्वज पूजन कराया गया।

शिव मंदिर का ध्वजदंड लगभग 19 फीट 7 इंच ऊंचा है, जबकि ध्वज की लंबाई करीब 9 फीट 3 इंच और चौड़ाई 4 फीट 7 इंच बताई गई है।

इस अवसर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चम्पत राय ने मंदिर निर्माण की तकनीकी और स्थापत्य विशेषताओं की जानकारी देते हुए कहा कि मंदिर को हजार वर्षों से अधिक समय तक सुरक्षित रखने के उद्देश्य से विशेष निर्माण पद्धति अपनाई गई है। उन्होंने बताया कि मंदिर परिसर में राम कथा से जुड़े भित्तिचित्र और सांस्कृतिक धरोहरों को भी संरक्षित किया गया है।

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Created On :   29 April 2026 9:21 PM IST

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