रांची में छात्रों की 'अगस्त क्रांति' में जिद, जुनून और आक्रोश और विरोध के कई रंग
रांची, 10 अगस्त (आईएएनएस)। झारखंड की राजधानी रांची ने सोमवार को जिस तरह का छात्र आंदोलन देखा, वह राज्य के 26 वर्षों के इतिहास में शायद पहली बार था। राज्य के अलग-अलग हिस्सों से जुटे हजारों छात्र जब विधानसभा मार्च के लिए निकले तो हर दूसरे-तीसरे हाथ में तिरंगा नजर आया।
पुरानी विधानसभा से मौजूदा विधानसभा तक लगाए गए 10 से ज्यादा बैरिकेड छात्रों के जनसैलाब के आगे एक-एक कर ध्वस्त होते गए। उन्हें रोकने के लिए कभी वाटर कैनन की बौछारें छोड़ी गईं तो कभी आंसू गैस के गोले दागे गए। स्थिति बिगड़ी तो लाठियां भी चलीं, लेकिन छात्रों की जिद ऐसी थी कि प्रशासन की कोई भी कार्रवाई उन्हें पीछे नहीं लौटा सकी।
नौ दिनों से अनशन कर रहे जेएलकेएम नेता देवेंद्र नाथ महतो भी इस आंदोलन की एक अलग तस्वीर बने। सुबह से जयपाल सिंह स्टेडियम में अनशन पर बैठे महतो जब विधानसभा की ओर निकले तो एंबुलेंस से जगन्नाथपुर मंदिर तक पहुंचे। वहां पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद समर्थकों ने उन्हें कंधों पर उठा लिया। कपड़े और डंडे से पालकी बनाई गई। महतो को उसी पालकी में बैठाकर समर्थक विधानसभा की ओर बढ़े। कुछ दूर तक उन्हें कंधों पर लेकर चला गया। उनके हाथ में पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन की तस्वीर थी।
उधर, विधानसभा की ओर बढ़ते छात्रों के सामने प्रशासन ने बैरिकेड की कई परतें खड़ी कर रखी थीं, लेकिन छात्र एक-एक कर उन्हें पार करते गए। आठवीं बैरिकेडिंग तक पहुंचते-पहुंचते सुरक्षा घेरा कई जगह टूट चुका था। छात्रों को रोकने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल हुआ। पानी की तेज बौछारें भी उन्हें पीछे नहीं कर सकीं। मुख्य सड़क पर पुलिस का घेरा मजबूत था। छात्रों ने रास्ता बदल लिया।
कई समूह खेतों, कच्चे और पहाड़ी रास्तों से विधानसभा की ओर बढ़ने लगे। जहां बैरिकेड मिला, उसे खींचकर किनारे कर दिया। रास्ता खुलता गया और छात्रों का हुजूम आगे बढ़ता गया। इस आंदोलन में विरोध का अंदाज भी अलग-अलग दिखाई दिया। किसी के हाथ में तिरंगा था तो कोई पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचा था। कुछ प्रदर्शनकारी स्पाइडरमैन और वनमानुष की वेशभूषा में नजर आए। उनके हाथों में विरोध के संदेश लिखे थे।
भीड़ में फिल्म ‘पुष्पा’ के किरदार की झलक भी दिखी। पूरे घटनाक्रम पर ड्रोन कैमरों से नजर रखी गई। सोमवार को रांची ने जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन की ऐसी कई तस्वीरें देखीं, जिनमें छात्रों का आक्रोश भी था और विरोध दर्ज कराने के कई अनोखे तरीके भी।
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Created On :   10 Aug 2026 9:12 PM IST












