1000 साल का हुआ गुजरात का मोढेरा सूर्य मंदिर, वास्तुकला और शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण

1000 साल का हुआ गुजरात का मोढेरा सूर्य मंदिर, वास्तुकला और शिल्पकला का अद्भुत उदाहरण
गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित ऐतिहासिक मोढेरा सूर्य मंदिर ने अपने निर्माण के करीब 1000 वर्ष पूरे कर लिए हैं। अपनी अद्भुत वास्तुकला, बारीक शिल्पकला और खगोलीय महत्व के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर गुजरात ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण 1026-27 ईस्वी के दौरान सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम के शासनकाल में कराया गया था।

मेहसाणा, 22 सितंबर (आईएएनएस)। गुजरात के मेहसाणा जिले में स्थित ऐतिहासिक मोढेरा सूर्य मंदिर ने अपने निर्माण के करीब 1000 वर्ष पूरे कर लिए हैं। अपनी अद्भुत वास्तुकला, बारीक शिल्पकला और खगोलीय महत्व के लिए प्रसिद्ध यह मंदिर गुजरात ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण प्रतीक है। माना जाता है कि मंदिर का निर्माण 1026-27 ईस्वी के दौरान सोलंकी वंश के राजा भीमदेव प्रथम के शासनकाल में कराया गया था।

मरु-गुर्जर स्थापत्य शैली में निर्मित इस मंदिर के तीन प्रमुख हिस्से-सूर्य कुंड, सभा मंडप और गर्भगृह हैं। ये तीनों हिस्से पूर्व से पश्चिम दिशा में एक सीधी रेखा में स्थित हैं। मंदिर की वास्तुकला में धार्मिक आस्था के साथ गणित और खगोलीय अवधारणाओं की झलक भी देखने को मिलती है।

मंदिर के सामने स्थित सूर्य कुंड इसकी प्रमुख विशेषताओं में शामिल है। कुंड के चारों ओर छोटे-बड़े कुल 108 मंदिर बनाए गए हैं। इसके बाद सभा मंडप आता है, जिसकी दीवारों और 52 स्तंभों पर बेहद बारीक नक्काशी की गई है। इन 52 स्तंभों को साल के 52 सप्ताहों से जोड़कर देखा जाता है। मंदिर के सबसे अंदरूनी हिस्से में स्थित गर्भगृह में कभी सूर्य देव की मुख्य प्रतिमा विराजमान थी। गर्भगृह में बने 24 स्तंभों को दिन के 24 घंटों का प्रतीक माना जाता है।

मोढेरा सूर्य मंदिर को लेकर यह भी मान्यता है कि वर्ष के कुछ विशेष समय में सूर्य की पहली किरण मंदिर के गर्भगृह तक पहुंचती थी। मंदिर की स्थापत्य योजना में सूर्य और प्रकाश के महत्व को विशेष रूप से स्थान दिया गया है।

देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक इस ऐतिहासिक स्थल को देखने पहुंचते हैं। पर्यटक शंकरभाई प्रजापति ने मंदिर की नक्काशी और ऐतिहासिक महत्व की सराहना करते हुए कहा कि इसे आज के समय में हर व्यक्ति को देखना चाहिए। वहीं, कलोल के कोठा गांव से पहुंचीं पर्यटक चंद्रिकाबेन ने भी मंदिर को देखने लायक बताते हुए लोगों से यहां आने की अपील की।

गुजरात सरकार की ओर से मंदिर परिसर में जनवरी में उत्तरार्ध महोत्सव का आयोजन भी किया जाता है। इसमें देशभर से आए कलाकार शास्त्रीय नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां देते हैं।

मोढेरा सूर्य मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए यूनेस्को ने दिसंबर 2022 में इसे विश्व धरोहर स्थलों की अस्थायी सूची में शामिल किया था। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा मंदिर का संरक्षण किया जा रहा है। एक हजार वर्ष पूरे करने के साथ मोढेरा सूर्य मंदिर आज भी भारतीय स्थापत्य, कला और सांस्कृतिक विरासत की भव्य पहचान बना हुआ है।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   22 Sept 2026 9:10 PM IST

Tags

Next Story