शरद पवार गुट के भाजपा के साथ जाने की चर्चा, अवधेश शुक्ला बोले- 'एमवीए' पर नहीं पड़ेगा कोई असर

शरद पवार गुट के भाजपा के साथ जाने की चर्चा, अवधेश शुक्ला बोले- एमवीए पर नहीं पड़ेगा कोई असर
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के संभावित विलय और उनके भाजपा के साथ जाने की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता अवधेश शुक्ला ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि एनसीपी के शरद पवार गुट के भाजपा के साथ जाने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में चल रही हैं, लेकिन इससे विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी और इंडिया गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शरद पवार महाराष्ट्र के बड़े नेता हैं और फिलहाल सभी को उनके स्वास्थ्य के ठीक होने का इंतजार करना चाहिए।

मुंबई, 6 नवंबर (आईएएनएस)। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के दोनों गुटों के संभावित विलय और उनके भाजपा के साथ जाने की अटकलों के बीच शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता अवधेश शुक्ला ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि एनसीपी के शरद पवार गुट के भाजपा के साथ जाने की चर्चाएं राजनीतिक गलियारों में चल रही हैं, लेकिन इससे विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी और इंडिया गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। शरद पवार महाराष्ट्र के बड़े नेता हैं और फिलहाल सभी को उनके स्वास्थ्य के ठीक होने का इंतजार करना चाहिए।

इसके साथ ही अवधेश शुक्ला ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी), विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयानों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार को मतदाता सूची से नागरिकों के नाम हटाए जाने के मुद्दे पर जवाब देना होगा।

एनसीपी के दोनों गुटों के विलय की संभावनाओं पर अवधेश शुक्ला ने कहा कि पार्टी पहले ही दो हिस्सों में बंट चुकी है। एक गुट शरद पवार के पास है, जबकि दूसरा अजित पवार के नेतृत्व में है। अजित पवार पहले ही भाजपा के साथ जा चुके हैं। अब जिस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां बन रही हैं, उससे ऐसा लग रहा है कि शरद पवार गुट के भी भाजपा के साथ जाने की संभावना पर चर्चा हो रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शरद पवार के स्वास्थ्य और सुप्रिया सुले को लेकर दिए गए बयान का जिक्र करते हुए कहा कि इससे भी राजनीतिक विलय की अटकलें तेज हुई हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी इस बारे में कुछ भी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता।

शुक्ला ने कहा कि सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जैसे नेता चाहते हैं कि शरद पवार भी उनके साथ आ जाएं। लेकिन शरद पवार के स्वास्थ्य में सुधार होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। राजनीति में कुछ भी संभव है, हालांकि फिलहाल भाजपा की ओर से ही इस तरह की बातें सामने आ रही हैं।

एनसीपी के शरद पवार गुट के अलग होने की संभावना पर शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता ने कहा कि इससे महाविकास आघाड़ी की ताकत पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में उनकी पार्टी लगातार महाराष्ट्र के किसानों, युवाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दे उठा रही है। उन्होंने आदित्य ठाकरे के अहिल्यानगर दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी पार्टी के नेता लगातार जमीन पर काम कर रहे हैं और जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठा रहे हैं। महाविकास आघाड़ी न अभी कमजोर है और न भविष्य में कमजोर होगी। यदि कोई नेता या दल गठबंधन छोड़कर जाना चाहता है तो वह स्वतंत्र है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा भाजपा शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता लागू करने की बात पर अवधेश शुक्ला ने कहा कि जब भी देशहित का सवाल आएगा, शिवसेना (यूबीटी) सरकार का समर्थन करेगी। उन्होंने कहा कि देश के हित में होने वाले फैसलों में उनकी पार्टी केंद्र सरकार का साथ देने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई कानून देशहित में नहीं होगा, तो शिवसेना उसका विरोध करेगी। यूजीसी कानून का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस कानून का समर्थन नहीं कर रही है, क्योंकि इससे जातिवाद को बढ़ावा मिल सकता है। हमारी पार्टी ऐसा कानून नहीं चाहती, जिससे समाज में जातिगत भेदभाव बढ़े।

एसआईआर के मुद्दे पर अमित शाह द्वारा राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने के आरोपों पर शुक्ला ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमित शाह के बयानों पर भरोसा करने से पहले सरकार को अपने दावों के आंकड़े सार्वजनिक करने चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि 2014 से अब तक सरकार ने कितने घुसपैठियों को देश से बाहर निकाला है? शुक्ला के मुताबिक, अब तक लगभग दो से ढाई हजार लोगों को निकाले जाने की जानकारी सामने आती है, जबकि अमित शाह तीन करोड़ का आंकड़ा बता रहे हैं। उन्होंने मांग की कि यदि सरकार के पास तीन करोड़ घुसपैठियों का आंकड़ा है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

अवधेश शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार एसआईआर के मुद्दे का इस्तेमाल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए कर रही है। एसआईआर की प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन इसके नाम पर जिन भारतीय नागरिकों के वोट काटे गए हैं, उसका जवाब भी देना होगा। ज्ञानेश कुमार को मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के मामले में जवाब देना चाहिए। शुक्ला ने भाजपा पर वोट चोरी के जरिए सरकार बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र और संविधान बचाने के नाम पर चल रही राजनीतिक गतिविधियां सरकार की नाकामी को छिपाने का प्रयास हैं।

उन्होंने दावा किया कि जब ज्ञानेश कुमार अपने पद से हटेंगे, तो इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह की भी राजनीतिक जवाबदेही तय होगी। सरकार को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।

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