बॉम्बे हाई कोर्ट के अहम फैसले: हत्या की जांच में हस्तक्षेप से इनकार, रामायण की पाइरेसी पर 3 घंटे में कार्रवाई और 54 वर्षीय महिला को सरोगेसी की अनुमति

हत्या की जांच में हस्तक्षेप से इनकार, रामायण की पाइरेसी पर 3 घंटे में कार्रवाई और 54 वर्षीय महिला को सरोगेसी की अनुमति
  • प्रदीप पूर्णेकर हत्याकांड में एसआईटी की जांच ट्रांसफर करने की मांग खारिज, परिवार को नियमित पीठ में जाने की छूट
  • फिल्म के पायरेटेड लिंक हटाने के लिए आईएसपी और डिजिटल प्लेटफॉर्म को निर्देश
  • प्रजनन का अधिकार व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा, उम्र के आधार पर सरोगेसी से वंचित नहीं कर सकते

डिजिटल डेस्क, मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने शुक्रवार को अलग-अलग मामलों में तीन महत्वपूर्ण फैसले सुनाए। शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता प्रदीप पूर्णेकर हत्याकांड में अदालत ने विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच का तरीका तय करने से इनकार करते हुए जांच ट्रांसफर करने की मांग खारिज कर दी। वहीं, फिल्म 'रामायण' की पाइरेसी रोकने के लिए कॉपीराइट धारक की शिकायत मिलने के 3 घंटे के भीतर पायरेटेड सामग्री हटाने का आदेश दिया। एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में अदालत ने 54 वर्षीय महिला को सरोगेसी के जरिए मां बनने की अनुमति देते हुए प्रजनन संबंधी विकल्प को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हिस्सा बताया।

हत्याकांड : एसआईटी की जांच में हस्तक्षेप से इनकार

ठाणे में 29 सितंबर को शिवसेना (उद्धव गुट) नेता प्रदीप पूर्णेकर की हत्या के मामले में उनके परिवार और शिकायतकर्ता मंदार घोडके ने जांच ट्रांसफर करने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनका आरोप था कि एसआईटी महत्वपूर्ण सबूतों को नजरअंदाज कर रही है और असली राजनीतिक साजिशकर्ताओं को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। न्यायमूर्ति अद्वैत सेठना और न्यायमूर्ति रणजीत सिंह भोंसले की पीठ ने तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।

पीठ ने कहा कि अदालत जांच के तरीके के बारे में एसआईटी को निर्देश नहीं दे सकती। घटना को अभी 37 दिन ही हुए हैं और चार्जशीट दाखिल करने में 45 दिन से अधिक का समय बाकी है। इस स्तर पर जांच ट्रांसफर करने की इतनी जल्दी क्यों है? विशेष लोक अभियोजक राजीव चव्हाण ने बताया कि हत्या के 10 दिनों के भीतर पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। शिकायतकर्ताओं की ओर से दिए गए सबूत फॉरेंसिक साइंस लैब भेजे गए हैं। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए परिवार को छुट्टियों के बाद नियमित पीठ के समक्ष मामला रखने की छूट दी।

रामायण की पाइरेसी पर 3 घंटे में कार्रवाई

फिल्म 'रामायण' के कॉपीराइट की सुरक्षा के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट ने इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर (आईएसपी) और डिजिटल प्लेटफॉर्म को महत्वपूर्ण निर्देश दिए। न्यायमूर्ति आशीष एस. चव्हाण ने गॉडपावर मीडिया प्राइवेट लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि कॉपीराइट धारक की ओर से टेकडाउन नोटिस मिलने के 3 घंटे के भीतर फिल्म की पायरेटेड सामग्री और लिंक हटाने होंगे।

अदालत ने संबंधित प्लेटफॉर्म को अपने नोडल अधिकारियों की संपर्क जानकारी उपलब्ध कराने और शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा। कंपनी ने 4,000 करोड़ रुपए के दो भागों वाले फिल्म प्रोजेक्ट की सुरक्षा की मांग की थी। उसका कहना था कि फिल्म के प्रीव्यू की रिकॉर्डिंग कर ऑनलाइन लीक किया गया और पाइरेटेड सामग्री कई प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है। मामले की अगली सुनवाई 16 दिसंबर को होगी।

54 वर्षीय महिला को सरोगेसी की अनुमति

एक अन्य मामले में न्यायमूर्ति भारती डांगरे और न्यायमूर्ति आशीष एस. चव्हाण की पीठ ने नासिक की 54 वर्षीय महिला को सरोगेसी के जरिए मां बनने की अनुमति दी। अदालत ने कहा कि प्रजनन संबंधी विकल्प और स्वायत्तता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन एवं व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा हैं।

दंपति ने लंबे समय से संतान प्राप्ति के असफल प्रयासों और बार-बार उपचार के बाद जेस्टेशनल सरोगेसी का विकल्प चुना था। नासिक महानगरपालिका के संबंधित प्राधिकरण ने महिला की उम्र 50 वर्ष से अधिक होने के कारण उनका आवेदन खारिज कर दिया था। कानून के अनुसार सरोगेसी के लिए महिला की उम्र 23 से 50 वर्ष और पुरुष की उम्र 26 से 55 वर्ष निर्धारित है।

अदालत ने कहा कि इस मामले की विशेष परिस्थितियों में केवल महिला की उम्र के आधार पर दंपति को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता, क्योंकि पति निर्धारित आयु सीमा में है। पीठ ने प्राधिकरण का फैसला रद्द करते हुए दंपति को पात्रता प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि वह कानून में निर्धारित आयु सीमा को रद्द नहीं कर रही है, बल्कि मौजूदा कानूनों की व्याख्या उनके मूल उद्देश्य के अनुरूप कर रही है।

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