बड़ा कदम: नागपुर से देशभर तक स्टार्टअप नेटवर्क का विस्तार करेगा आईआईटी बॉम्बे का एसआईएनई

नागपुर से देशभर तक स्टार्टअप नेटवर्क का विस्तार करेगा आईआईटी बॉम्बे का एसआईएनई
  • 10 संस्थान मिलकर बढ़ाएंगे स्टार्टअप और डीप-टेक इकोसिस्टम
  • स्टार्टअप और डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूत बनाने की पहल

डिजिटल डेस्क, मुंबई. देश में स्टार्टअप और डीप-टेक इकोसिस्टम को मजबूत बनाने के लिए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के सोसायटी फॉर इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप (एसआईएनई) ने राष्ट्रीय स्तर पर हब-एंड-स्पोक पहल शुरू की है। इसके तहत देश के विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों, रिसर्च सेंटरों और स्टार्टअप इन्क्यूबेटरों को एक नेटवर्क से जोड़कर नवाचार, तकनीकी उद्यमिता और स्टार्टअप विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इस पहल के तहत नागपुर को पहला क्षेत्रीय केंद्र बनाया गया है। इस मॉडल में एसआईएनई केंद्रीय हब के रूप में काम करेगा। वह सहयोगी संस्थानों को स्टार्टअप इन्क्यूबेशन, मेंटरशिप, निवेशकों से संपर्क, पोर्टफोलियो प्रबंधन और उद्योग से जुड़ने में सहायता प्रदान करेगा। वहीं, सहयोगी संस्थान अपनी शोध सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, तकनीकी विशेषज्ञता और स्थानीय उद्योगों के नेटवर्क के जरिए योगदान देंगे। इस पहल के तहत करीब एक महीने पहले नागपुर स्थित विश्वेश्वरैया राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (वीएनआईटी) में बैठक आयोजित की गई थी।

इसमें वीएनआईटी, एआईआईएमएस नागपुर, आईआईएम नागपुर, आईआईआईटी नागपुर, राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय, वाईसीसीई और अन्य संस्थान शामिल थे। इस अवसर पर एसआईएनई और वीएनआईटी वेंचर वॉल्ट फाउंडेशन (वी3एफ) के बीच समझौता किया गया। योजना के अंतर्गत स्टार्टअप को संयुक्त इन्क्यूबेशन, निवेशकों से संपर्क, विशेषज्ञ मार्गदर्शन, सरकारी अनुदान, तकनीक के व्यावसायीकरण और उद्योगों से जुड़ने में मदद मिलेगी। डीप-टेक, हेल्थकेयर, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, मैन्युफैक्चरिंग, खनन और मत्स्य क्षेत्र में भी सहयोग की संभावनाएं तलाश की जाएंगी। आगे नियमित बैठकें, संस्थानों के दौरे, ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रम और स्टार्टअप के लिए निवेशक संवाद आयोजित किए जाएंगे। एसआईएनई की योजना इस मॉडल को भविष्य में देश के अन्य शहरों और राज्यों तक विस्तारित करने की है। आईआईटी बॉम्बे के उपनिदेशक प्रो. मिलिंद आत्रे और एसआईएनई के प्रभारी प्रोफेसर निशांत शर्मा ने कहा कि इस पहल से क्षेत्रीय संस्थानों की क्षमताओं को राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़कर देश में नवाचार और तकनीकी उद्यमिता को नई गति मिलेगी।

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