सियासी घमासान: गोकुल में सरकार के फैसले से सतेज पाटील को झटका, शासन नियुक्त 4 संचालकों को मिलेगा मतदान का अधिकार

गोकुल में सरकार के फैसले से सतेज पाटील को झटका, शासन नियुक्त 4 संचालकों को मिलेगा मतदान का अधिकार
  • 13 सीटें जीतने के बावजूद सत्ता से दूर रह सकता है सतेज पाटील का पैनल
  • सरकार के फैसले से सतेज पाटील को झटका
  • कोरम के मुद्दे पर भी महायुति को घेरा

डिजिटल डेस्क, मुंबई. राज्य की प्रतिष्ठित कोल्हापुर जिला सहकारी दूध उत्पादक संघ (गोकुल) के अध्यक्ष पद को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। अध्यक्ष चुनाव से ठीक पहले राज्य सरकार ने गोकुल में पांच शासन नियुक्त संचालकों की नियुक्ति का फैसला किया है। इनमें चार राजनीतिक और एक सरकारी प्रतिनिधि होगा। सरकारी प्रतिनिधि को मतदान का अधिकार नहीं होगा जबकि चार सदस्यों को मतदान का अधिकार होगा। सरकार के इस फैसले से कांग्रेस नेता सतेज पाटील के नेतृत्व वाले राजर्षि शाहू शेतकरी समविचारी आघाड़ी को बड़ा झटका लग सकता है। चुनाव में 13 सीटें जीतने के बावजूद यह आघाड़ी सत्ता से बाहर हो सकती है। राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस फैसले को मंजूरी दी गई।

कोरम के मुद्दे पर भी महायुति को घेरा

गोकुल अध्यक्ष चुनाव में कोरम का मुद्दा भी विवाद की वजह बना हुआ है। अध्यक्ष के चुनाव के लिए 14 संचालकों की उपस्थिति जरूरी मानी जाती है। लेकिन कोरम पूरा नहीं होने के कारण चुनाव नहीं हो सका। मुंबई हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार अब 10 नवंबर को अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए बैठक बुलाई है। इस बीच महायुति की ओर से कोरम के लिए अतिरिक्त संचालकों के समर्थन की बात कही जा रही है। इस पर सतेज पाटील ने तंज कसते हुए कहा कि यह तर्क हास्यास्पद है। उन्होंने कहा हमारे एक निर्वाचित संचालक को वहां भेजकर आपका अध्यक्ष बनाया जाए, तो फिर हमें बहुमत किसलिए दिया गया? महायुति कहती है कि जनता ने उसे विपक्ष में बैठने का जनादेश दिया है, तो उसे अपनी यह भूमिका निभानी चाहिए।

गोकुल में साढ़े पांच लाख किसानों की सत्ता है

सतेज पाटील ने कहा कि गोकुल में किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि साढ़े पांच लाख किसानों की सत्ता है। चुनाव में जीतकर आए 25 संचालक और करीब 5 हजार 500 प्रस्तावक प्रतिनिधि मिलकर संघ का कामकाज चलाएंगे। उन्होंने कहा कि उनका चुनावी एजेंडा शुरू से स्पष्ट था। उनका उद्देश्य साढ़े पांच लाख दूध उत्पादक किसानों को न्याय दिलाना था। उन्होंने अपने ऊपर व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए राजनीति करने के आरोपों को भी खारिज किया। पाटील ने कहा कि अगर यह सब मेरे व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए होता तो मेरा बेटा चुनाव लड़ता। हमारे समर्थकों ने कभी भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। चुनाव में हमने किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की।

2029 में सत्ता बदलेगी, हम भी याद रखेंगे

सतेज पाटील ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि लोकतंत्र के फैसले को दरकिनार किया जाएगा तो कोई चुप नहीं बैठेगा। उन्होंने कहा कि 2029 में भी सत्ता परिवर्तन होगा। उस समय हम भी इन बातों को याद रखेंगे। मैंने तो पहले ही कहा था कि चुनाव जीतने के बाद गोकुल में सभी मिलकर काम करेंगे। सरकार के नए फैसले के बाद गोकुल अध्यक्ष पद का चुनाव अब और दिलचस्प हो गया है। हालांकि शासन नियुक्त संचालकों की नियुक्ति को हाईकोर्ट में चुनौती दिए जाने की संभावना भी जताई जा रही है। ऐसे में अध्यक्ष पद का चुनाव एक बार फिर कानूनी विवाद में फंस सकता है।

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