बड़ा निशाना: राहुल गांधी ने कहा - गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हराया, तो चुनाव बाद बदला नियम

राहुल गांधी ने कहा - गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हराया, तो चुनाव बाद बदला नियम
  • सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही भाजपा
  • केंद्र सरकार पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे
  • गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया, तो भाजपा ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली. लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे की मांग को लेकर भाजपा और केंद्र सरकार पर हमला करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। भाजपा पर ‘वोट चोरी’ का आरोप लगा रहे राहुल गांधी को ‘गोकुल मिल्क फेडरेशन’ के चुनाव ने सत्तारूढ़ दल पर हमले का एक और मौका दे दिया है। विपक्ष के नेता ने कहा है कि भाजपा इतनी हताश हो चुकी है कि हर जगह सत्ता बचाने के लिए किसी भी हद तक जा रही है। इस बार उसने दूध उत्पादकों का वोट चुराया है, लेकिन उसे याद रखना चाहिए कि किसान भूलता नहीं है।

राहुल गांधी ने गुरुवार को सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर कांग्रेस मीडिया एवं पब्लिसिटी विभाग के चेयरमैन पवन खेड़ा की पोस्ट को साझा करते हुए कहा कि गोकुल में दूध उत्पादकों ने भाजपा को हरा दिया, तो भाजपा ने चुनाव के बाद नियम बदल दिए । 4 डायरेक्टर ठूँसो, 12 को 16 बनाओ, बहुमत चुराओ। ये दूध उत्पादकों के वोट की चोरी है,जनादेश में मिलावट।

पवन खेडा ने भी अपने पोस्ट में महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकार, 'गोकुल मिल्क फेडरेशन' में दूध उत्पादकों के लोकतांत्रिक जनादेश को कमजोर करने की बेशर्म कोशिश कर रही है। इसके लिए वह कानूनी बदलावों का सहारा लेकर, चुने हुए बोर्ड की संरचना में हेरफेर करने का प्रयास कर रही है। 19 अक्टूबर के चुनावों में, कांग्रेस के नेतृत्व वाले पैनल ने 25 में से 13 सीटें जीतीं और ‘महायुति’ की 12 सीटों के मुकाबले बहुमत हासिल किया।

जब ‘महायुति’ समर्थित निदेशकों ने बैठक से अनुपस्थित रहकर चेयरमैन के चुनाव को रोक दिया, तो बॉम्बे हाई कोर्ट ने 10 नवंबर को फिर से चुनाव कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि चुने हुए बोर्ड को काम करने देने के बजाय, राज्य कैबिनेट ने चार सरकारी निदेशकों को नामित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है, जिन्हें वोट देने का अधिकार भी होगा। कांग्रेस नेता ने कहा कि हम लोकतांत्रिक जनादेश और सहकारी संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा के लिए, इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं।

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