ईडी की बड़ी कार्रवाई, विदेशी लेन-देन और शेयर गतिविधियों की जांच तेज

ईडी की बड़ी कार्रवाई, विदेशी लेन-देन और शेयर गतिविधियों की जांच तेज
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा), 1999 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु और मुंबई में स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और उससे जुड़े लोगों के नौ ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह कार्रवाई 23 जून को शुरू की गई, जो फेमा के कथित उल्लंघन से जुड़ी चल रही जांच का हिस्सा है।

नई दिल्ली, 24 जून (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (फेमा), 1999 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए बेंगलुरु और मुंबई में स्थित राजेश एक्सपोर्ट्स लिमिटेड (आरईएल) और उससे जुड़े लोगों के नौ ठिकानों पर तलाशी और जब्ती अभियान चलाया। यह कार्रवाई 23 जून को शुरू की गई, जो फेमा के कथित उल्लंघन से जुड़ी चल रही जांच का हिस्सा है।

ईडी की जांच में कंपनी के विदेशी लेन-देन, निवेश, व्यापारिक गतिविधियों और वित्तीय रिकॉर्ड से जुड़े कई गंभीर मुद्दे सामने आने की बात कही गई है। एजेंसी के अनुसार, आरईएल विदेशी लेन-देन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने में असफल रही। इनमें आयात-निर्यात, विदेशी निवेश, विदेशी व्यापार से जुड़ी प्राप्तियां और भुगतान का विवरण शामिल है। ईडी का कहना है कि रिकॉर्ड के अभाव में कई विदेशी लेन-देन की वास्तविकता की पुष्टि करना मुश्किल हो गया है।

जांच के दौरान अफ्रीकी खदानों में करीब 1,035 करोड़ रुपए के निवेश के दावे से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। ईडी के मुताबिक, इस निवेश से संबंधित पुराने रिकॉर्ड और जरूरी दस्तावेज अब तक उपलब्ध नहीं कराए गए हैं।

एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि कंपनी लगभग 3,000 करोड़ रुपए के विदेशी व्यापार भुगतान के मुकाबले विदेशी व्यापार प्राप्तियों की संदिग्ध तरीके से नेटिंग या सेट-ऑफ व्यवस्था में शामिल रही। इसमें यूएई और अन्य विदेशी स्थानों पर स्थित कुछ संदिग्ध विदेशी पक्षों की भूमिका की जांच की जा रही है।

तलाशी के दौरान स्टॉक की भौतिक जांच में भी अंतर सामने आने की बात ईडी ने कही है। एजेंसी के अनुसार, फैक्ट्री रिकॉर्ड में दर्ज स्टॉक और मौके पर मिले वास्तविक स्टॉक के बीच करीब 40 प्रतिशत का अंतर पाया गया।

ईडी ने कंपनी के प्रबंधन से जुड़े भुगतान पर भी सवाल उठाए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, कंपनी के बड़े कारोबारी स्तर की तुलना में वरिष्ठ अधिकारियों को दिया गया पारिश्रमिक असामान्य दिखाई देता है। एजेंसी ने बताया कि कंपनी के चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (सीएफओ) को वर्ष 2020 से वेतन नहीं मिला, जबकि मैनेजिंग डायरेक्टर (एमडी) को प्रति माह केवल 17,000 रुपए का भुगतान किया गया, जबकि कंपनी ने करीब 7.7 लाख करोड़ रुपए का समेकित राजस्व बताया था।

इसके अलावा, ईडी ने कंपनी के शेयरों में कथित संदिग्ध ब्लॉक ट्रेड और संभावित शेयर हेरफेर की भी जांच शुरू की है। एजेंसी के अनुसार, कुछ ऐसे व्यक्तियों की भूमिका सामने आई है जिनके नाम इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स (आईसीआईजे) के लीक में भी सामने आए थे। जांच में एनआरआई बेनामीदारों के माध्यम से शेयर गतिविधियों के जरिए कथित तौर पर 600 करोड़ रुपए से अधिक की राशि भारत से बाहर भेजने के आरोपों की भी पड़ताल की जा रही है।

तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। एजेंसी इन सबूतों की विस्तृत जांच कर रही है। मामले में आगे की कार्रवाई जांच के निष्कर्षों के आधार पर की जाएगी।

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Created On :   24 Jun 2026 6:27 PM IST

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