तेलंगाना 326 करोड़ बैंक फ्रॉड मामले में ईडी ने केवीपीएल से जुड़े 7 ठिकानों पर मारा छापा

तेलंगाना 326 करोड़ बैंक फ्रॉड मामले में ईडी ने केवीपीएल से जुड़े 7 ठिकानों पर मारा छापा
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने शुक्रवार को तेलंगाना के हैदराबाद, सिकंदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरी में स्थित 7 ठिकानों पर 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया। जिन जगहों पर तलाशी ली गई, उनमें मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (केवीपीएल) के रजिस्टर्ड ऑफिस, इसके निदेशकों के आवास और उन संस्थाओं व व्यक्तियों के ठिकाने शामिल हैं, जिन्होंने बैंक फंड को दूसरी जगह भेजने (डायवर्जन) में मदद की थी।

हैदराबाद, 24 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के हैदराबाद जोनल कार्यालय ने शुक्रवार को तेलंगाना के हैदराबाद, सिकंदराबाद और मेडचल-मलकाजगिरी में स्थित 7 ठिकानों पर 'प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट' (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत तलाशी अभियान चलाया। जिन जगहों पर तलाशी ली गई, उनमें मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड (केवीपीएल) के रजिस्टर्ड ऑफिस, इसके निदेशकों के आवास और उन संस्थाओं व व्यक्तियों के ठिकाने शामिल हैं, जिन्होंने बैंक फंड को दूसरी जगह भेजने (डायवर्जन) में मदद की थी।

यह तलाशी मेसर्स कनकधरा वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड और इसके निदेशकों द्वारा क्रेडिट सुविधाओं के कथित डायवर्जन की चल रही जांच के सिलसिले में की गई। ईडी की यह जांच पंजाब नेशनल बैंक की शिकायत पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीई) द्वारा 8 दिसंबर 2022 में दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। एफआईआर में मेसर्स केवीपीएल के निदेशकों और अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है।

यह मामला पंजाब नेशनल बैंक के नेतृत्व वाले बैंकों के एक समूह (आईडीबीआईबैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, यूबीआई और बैंक ऑफ बड़ौदा) के साथ धोखाधड़ी से जुड़ा है, जिससे 326.49 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।

ईडी की जांच से पता चला है कि केवीपीएल को दी गई बैंक गारंटी और लेटर ऑफ क्रेडिट सुविधाओं का गलत इस्तेमाल किया गया। साथ ही, फंड को संबंधित संस्थाओं और बिचौलियों के जरिए दूसरी जगह भेज दिया गया। इसमें स्टील खरीद के फर्जी इनवॉइस और ट्रांसपोर्ट दस्तावेजों का भी इस्तेमाल किया गया था। यह भी पता चला है कि केवीपीएल ने कर्ज देने वाले बैंकों की जानकारी के बिना, कंसोर्टियम व्यवस्था के बाहर बैंक खाते चलाए थे।

तलाशी अभियान के दौरान फंड को इधर-उधर करने (डायवर्जन) और उसे छिपाने (लेयरिंग) से जुड़े आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और अन्य रिकॉर्ड मिले, जिन्हें जब्त कर लिया गया। इसके अलावा, 15 लाख रुपये की बिना हिसाब-किताब वाली नकदी भी जब्त की गई। साथ ही, कई अचल संपत्तियों और निवेशों की भी पहचान की गई है। आगे की जांच चल रही है।

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