त्रियुगीनारायण मंदिर देवभूमि की आध्यात्मिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक सीएम पुष्कर सिंह धामी

त्रियुगीनारायण मंदिर देवभूमि की आध्यात्मिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक सीएम पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए रुद्रप्रयाग जिले में स्थित पवित्र त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इसे अत्यंत दिव्य और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बताया और श्रद्धालुओं से यहां आकर दर्शन करने की अपील की। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि रुद्रप्रयाग जनपद में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को त्रियुगीनारायण मंदिर के दर्शन अवश्य करने चाहिए।

रुद्रप्रयाग, 5 जुलाई (आईएएनएस)। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट शेयर करते हुए रुद्रप्रयाग जिले में स्थित पवित्र त्रियुगीनारायण मंदिर के बारे में जानकारी दी। उन्होंने इसे अत्यंत दिव्य और पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण तीर्थस्थल बताया और श्रद्धालुओं से यहां आकर दर्शन करने की अपील की। मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि रुद्रप्रयाग जनपद में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को त्रियुगीनारायण मंदिर के दर्शन अवश्य करने चाहिए।

मुख्यमंत्री धामी ने अपने एक्स पोस्ट में कहा, "रुद्रप्रयाग जनपद में स्थित त्रियुगीनारायण मंदिर अत्यंत पवित्र और दिव्य तीर्थस्थल है। पौराणिक मान्यता है कि यही वह पुण्यभूमि है जहां भगवान शिव और माता पार्वती का दिव्य विवाह संपन्न हुआ था। देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का अद्वितीय प्रतीक यह मंदिर श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। रुद्रप्रयाग जनपद आगमन पर इस पावन मंदिर के दर्शन अवश्य करें।"

बता दें कि देवभूमि उत्तराखंड अपनी आध्यात्मिकता, परंपराओं और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है और त्रियुगीनारायण मंदिर इस पहचान को और अधिक मजबूत करता है। इसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है और यह स्थान सदियों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर हिमालय की गोद में स्थित होने के कारण एक शांत, दिव्य और आध्यात्मिक वातावरण प्रदान करता है, जो श्रद्धालुओं को एक विशेष अनुभव का एहसास कराता है।

त्रियुगीनारायण मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यही वह पवित्र भूमि है जहां भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था। मंदिर में स्थित पवित्र अखंड धूनी को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का साक्षी माना जाता है। इस कारण यह स्थान हिंदू धर्म में विशेष आस्था और श्रद्धा का केंद्र माना जाता है। यहां हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। कई कपल यहां पर शादी के लिए भी पहुंचते हैं।

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Created On :   5 July 2026 10:41 AM IST

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