उम्र में छोटी, लेकिन पर्दे पर बनीं नाना पाटेकर की मां, ऐसी थी मधु कांबिकर की कहानी

उम्र में छोटी, लेकिन पर्दे पर बनीं नाना पाटेकर की मां, ऐसी थी मधु कांबिकर की कहानी
मराठी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री और लावणी कलाकार मधु कांबिकर हमारे बीच नहीं रहीं। 73 साल की उम्र में उनके निधन की खबर से मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। मधु कांबिकर ने अपने लंबे करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन नाना पाटेकर के साथ उनकी फिल्मों को खास तौर पर याद किया जाता है।

मुंबई, 12 अक्टूबर (आईएएनएस)। मराठी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री और लावणी कलाकार मधु कांबिकर हमारे बीच नहीं रहीं। 73 साल की उम्र में उनके निधन की खबर से मराठी फिल्म इंडस्ट्री में शोक की लहर है। मधु कांबिकर ने अपने लंबे करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन नाना पाटेकर के साथ उनकी फिल्मों को खास तौर पर याद किया जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि पर्दे पर कई बार नाना पाटेकर की मां बनने वाली मधु उनसे उम्र में करीब दो साल छोटी थीं। दोनों ने साथ काम करते हुए ऐसे किरदार निभाए, जिन्हें दर्शकों ने पसंद किया।

मधु कांबिकर ने सोमवार को पुणे में आखिरी सांस ली। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह लंबे समय से बीमार थीं। उन्होंने अपने अभिनय से मराठी सिनेमा में अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने फिल्मों में कई तरह के किरदार निभाए, लेकिन मां और सास के रोल में भी उन्हें खूब पसंद किया गया।

नाना पाटेकर के साथ उनकी जोड़ी भी काफी चर्चा में रही। मधु ने फिल्मों में नाना की मां का किरदार निभाया, जबकि असल जिंदगी में वह उनसे करीब दो साल छोटी थीं। उम्र के इस अंतर के बावजूद उन्होंने अपने अभिनय से किरदारों को इस तरह निभाया कि दर्शकों को पर्दे पर उनका रिश्ता स्वाभाविक लगा।

मधु कांबिकर ने नाना पाटेकर के साथ 'हम दोनों' और 'यशवंत' जैसी फिल्मों में काम किया था। इन फिल्मों में उन्होंने नाना की मां की भूमिका निभाई। इसके अलावा वह गोविंदा और दिव्या भारती की फिल्म 'शोला और शबनम' में भी नजर आई थीं।

मधु कांबिकर का करियर चार दशक से भी ज्यादा लंबा रहा। वह मराठी फिल्मों के साथ थिएटर और लोक कला की दुनिया में भी एक्टिव रहीं। 'एक होता विदूषक', 'झपाटलेला', 'हेच माझा माहेर', 'रघु मैना' और 'येऊ का घरात' जैसी फिल्मों में उनके काम को याद किया जाता है। उन्होंने 'सूत्रधार', 'यशवंत' और 'हम दोनों' जैसी हिंदी फिल्मों में भी काम किया।

अभिनय के अलावा, मधु कांबिकर की पहचान एक बेहतरीन लावणी कलाकार के रूप में भी रही। लावणी महाराष्ट्र की पारंपरिक लोक कला है, जिसमें संगीत, डांस और अभिनय का खास मेल होता है।

मधु कांबिकर की जिंदगी में नवंबर 2016 में एक ऐसा मोड़ आया, जिसके बाद वह पहले की तरह मंच पर परफॉर्म नहीं कर सकीं। उन्हें 27 नवंबर 2016 को मुंबई के माटुंगा स्थित यशवंत नाट्य मंदिर में एक डांस परफॉर्मेंस के दौरान स्ट्रोक आया था। वह करीब 12 साल के अंतराल के बाद मंच पर डांस करने लौटी थीं। परफॉर्मेंस के दौरान तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्होंने अपना प्रदर्शन जारी रखा, लेकिन बाद में उनकी हालत खराब हो गई।

स्ट्रोक के बाद उनके दाहिने हाथ ने काम करना बंद कर दिया। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। इस घटना के बाद उनका अभिनय और डांस से जुड़ा सफर थम गया। अब उनके निधन से मराठी सिनेमा और लोक कला जगत में शोक की लहर है।

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Created On :   12 Oct 2026 7:41 PM IST

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