उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में लोगों ने मिलकर 'हेवल' नदी को नया जीवन देने का किया प्रयास पीएम मोदी

उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में लोगों ने मिलकर हेवल नदी को नया जीवन देने का किया प्रयास  पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के 139वें एपिसोड में उत्तराखंड की हेवल नदी का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में लोगों ने मिलकर एक नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया है। ये नदी है 'हेवल'।

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम के 139वें एपिसोड में उत्तराखंड की हेवल नदी का जिक्र किया। पीएम मोदी ने कहा कि उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में लोगों ने मिलकर एक नदी को नया जीवन देने का प्रयास किया है। ये नदी है 'हेवल'।

पीएम मोदी ने बताया कि कुछ समय पहले हेवल नदी में पानी कम होने लगा था। आसपास के प्राकृतिक जल-स्रोत भी सूख रहे थे। ऐसे में स्थानीय प्रशासन और गांव के लोगों ने मिलकर हेवल नदी को बचाने का अभियान चलाया।

इस अभियान के दौरान बारिश के पानी को रोकने के उपाय किए गए, जमीन में पानी पहुंचाने के लिए काम हुआ और बड़ी संख्या में पौधे लगाए गए। आज इस प्रयास से हेवल नदी को नया जीवनदान मिला है और साथ ही दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोतों के पुनर्जीवन में भी मदद मिली है।

बता दें कि हेवल नदी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में नरेंद्र नगर वन प्रभाग के अंतर्गत आती है। यह नदी सुरकंडा देवी और नागदेवता मंदिर के पास के जंगलों से 'खुरेत गाड़' के रूप में निकलती है। यह लगभग 8,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित है।

हेवल नदी को बचाने की कहानी साल 2019-20 में शुरू हुई थी। भारतीय वन सेवा के अधिकारी धर्म सिंह मीणा के नेतृत्व में वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों ने मिलकर 'हेवल नदी पुनर्जीवन' परियोजना शुरू की थी। इसे लैंडस्केप-बेस्ड रेस्टोरेशन के तौर पर शुरू किया गया था।

इस प्रोजेक्ट के तहत पूरे क्षेत्र में पानी को संरक्षित करने पर जोर दिया गया। पहाड़ों पर ऐसे गड्ढे और संरचनाएं बनाई गईं जिससे बारिश का पानी रुके और जमीन के अंदर जा सके। साथ ही बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया ताकि जंगल फिर से हरे-भरे हो सकें और जल स्रोतों को ताकत मिले।

हेवल नदी का महत्व सिर्फ जल स्रोत के तौर पर ही नहीं है। ऋषिकेश के नजदीक होने के कारण इसका तटीय क्षेत्र पर्यटन के लिहाज से भी काफी लोकप्रिय है। रत्तापानी और नीलकंठ रोड जैसे इलाकों में लक्जरी रिवरसाइड कैंपिंग, ईको-टूरिज्म और एडवेंचर गतिविधियां काफी पसंद की जाती हैं।

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