वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी तकनीक पर नहीं, मानसिक पक्ष पर बात होनी चाहिए अभिषेक नायर

वैभव सूर्यवंशी की बल्लेबाजी तकनीक पर नहीं, मानसिक पक्ष पर बात होनी चाहिए अभिषेक नायर
इंग्लैंड के खिलाफ भारत के निराशाजनक टी20 अभियान के बाद टीम इंडिया के पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर संतुलित और धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है। उनका मानना है कि युवा खिलाड़ियों के शुरुआती संघर्ष को केवल तकनीकी खामियों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति और आत्मविश्वास को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।

नई दिल्ली, 16 जुलाई (आईएएनएस)। इंग्लैंड के खिलाफ भारत के निराशाजनक टी20 अभियान के बाद टीम इंडिया के पूर्व सहायक कोच अभिषेक नायर ने युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी को लेकर संतुलित और धैर्यपूर्ण दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी है। उनका मानना है कि युवा खिलाड़ियों के शुरुआती संघर्ष को केवल तकनीकी खामियों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति और आत्मविश्वास को भी उतना ही महत्व दिया जाना चाहिए।

इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत करने वाले वैभव सूर्यवंशी से आईपीएल जैसी बल्लेबाजी की उम्मीद थी, लेकिन उनका प्रदर्शन निराशाजनक रहा। तीन मैचों में की तीन पारियों में वह एक भी बड़ा स्कोर नहीं बना सके। इसके बाद उनकी तकनीकी क्षमता पर सवाल उठे।

अभिषेक नायर ने कहा कि युवा खिलाड़ी को आलोचना या तकनीकी सलाहों से घेरने के बजाय उसकी मानसिक स्थिति को समझना अधिक जरूरी है। जियोस्टार पर नायर ने कहा कि सबसे पहले यह समझना चाहिए कि खिलाड़ी खुद कैसा महसूस कर रहा है। एक युवा क्रिकेटर पहले से ही कई तरह की भावनात्मक उलझनों से गुजरता है। कुछ मैच पहले तक उसकी बल्लेबाजी की हर ओर तारीफ हो रही होती है और अचानक खराब प्रदर्शन के बाद वही खिलाड़ी आलोचना का केंद्र बन जाता है। ऐसे बदलाव को संभालना आसान नहीं होता।

नायर ने कहा, शुरुआती बातचीत बल्लेबाजी की तकनीक पर नहीं, बल्कि खिलाड़ी के अनुभव और उसके मानसिक पक्ष पर होनी चाहिए। कोच और सपोर्ट स्टाफ को यह जानने की कोशिश करनी चाहिए कि खिलाड़ी मैदान पर क्या सोच रहा था, किन परिस्थितियों से गुजर रहा था और वह किन चुनौतियों का सामना कर रहा है। जब खिलाड़ी खुद अपने अनुभवों को खुलकर साझा करता है, तब उसकी सोच अधिक स्पष्ट होती है और वह समाधान भी बेहतर तरीके से तलाश पाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि युवा खिलाड़ी को यह महसूस नहीं होने देना चाहिए कि वह किसी बड़ी समस्या में फंस गया है। इसके बजाय उसे यह समझाना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में हर गेंदबाज अलग रणनीति के साथ आता है और हर चुनौती का समाधान भी अलग होता है। इसलिए खिलाड़ी को खुद सोचने, परिस्थितियों का विश्लेषण करने और अपनी योजना विकसित करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

नायर ने इस दौरान सपोर्ट स्टाफ की भूमिका को भी बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि कोच या सपोर्ट स्टाफ को अपनी भावनाएं खिलाड़ी पर नहीं थोपनी चाहिए। उनका काम खिलाड़ी की भावनाओं को समझना, उसका आत्मविश्वास बनाए रखना और उसे मानसिक रूप से अगले मुकाबले के लिए तैयार करना है। यदि खिलाड़ी साफ दिमाग के साथ मैदान पर उतरता है तो वह अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करने में सक्षम होता है।

भारत के हालिया प्रदर्शन की तुलना 2024 में दक्षिण अफ्रीका के सफल टी20 दौरे से किए जाने पर भी नायर ने असहमति जताई। उनके अनुसार दोनों परिस्थितियां पूरी तरह अलग थीं। उन्होंने कहा कि दक्षिण अफ्रीका में बल्लेबाजी के लिए अनुकूल पिचें थीं और वहां टीम के पास लय तथा आत्मविश्वास दोनों मौजूद थे। इसके विपरीत इंग्लैंड दौरे से पहले टीम को पर्याप्त तैयारी का समय नहीं मिला।

नायर ने बताया कि आईपीएल के बाद खिलाड़ियों को ब्रेक मिला, जिसके कारण टीम बिना ज्यादा तैयारी के आयरलैंड सीरीज में उतरी। इसके अलावा नया कप्तान, टीम में नए चेहरे और वैभव सूर्यवंशी को लेकर लगातार हो रही चर्चा ने भी टीम का ध्यान प्रभावित किया। उनके मुताबिक, कई बार बाहरी माहौल भी खिलाड़ियों पर अनावश्यक दबाव बना देता है।

भारतीय बल्लेबाजों के शॉर्ट बॉल के खिलाफ संघर्ष पर भी नायर ने अपनी राय रखी। उन्होंने स्वीकार किया कि टीम को इस रणनीति के खिलाफ मुश्किलों का सामना करना पड़ा, लेकिन इसे स्थायी कमजोरी मानने से इनकार किया। उन्होंने कहा कि ईशान किशन, अभिषेक शर्मा और वैभव सूर्यवंशी जैसे बल्लेबाज पहले भी तेज गेंदबाजों और शॉर्ट गेंदों के खिलाफ सफल रहे हैं। ऐसे में कुछ मैचों के आधार पर उनकी क्षमता पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा।

नायर का मानना है कि आयरलैंड सीरीज में खराब प्रदर्शन का असर इंग्लैंड दौरे पर भी देखने को मिला। टीम आत्मविश्वास की कमी से जूझ रही थी और कई मुकाबलों में छोटे-छोटे अंतर भारत के खिलाफ चले गए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि कुछ अहम मौकों पर नतीजे अलग होते तो पूरी चर्चा का स्वरूप भी बदल सकता था।

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Created On :   16 July 2026 5:41 PM IST

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