वंदे मातरम जो कहें उनका भी सम्मान हो, जो न कहें उनके अधिकारों का भी सैयद अब्बास नकवी
लखनऊ, 17 जुलाई (आईएएनएस)। शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने वंदे मातरम् पर कानून बनाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति को वंदे मातरम् कहने या न कहने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
शिया धर्मगुरु सैयद सैफ अब्बास नकवी ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “वंदे मातरम् को मुद्दा बनाकर और लोगों से इसे जबरदस्ती कहलवाने की कोशिश करना मेरे हिसाब से हमारे संविधान की भावना के खिलाफ है। संविधान शिक्षा और आजादी की बात करता है।”
उन्होंने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् कहते हैं, उनका सम्मान होना चाहिए, लेकिन जो लोग इसे नहीं कहते, उनके अधिकारों का भी सम्मान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी को भी राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान नहीं करना चाहिए।
उन्होंने सरकारों की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि देश में कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर सख्त कानूनों और तत्काल कार्रवाई की जरूरत है, लेकिन कई बार राजनीतिक बहसें धार्मिक मुद्दों की ओर चली जाती हैं, जिससे समाज में विभाजन बढ़ता है।
झारखंड से एक वायरल वीडियो में मौलाना जरजिस अंसारी द्वारा कथित तौर पर भगवान कृष्ण को मुस्लिम और नमाज पढ़ने वाला बताए जाने के मामले पर भी सैयद सैफ अब्बास नकवी ने आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि उन्होंने बयान और वीडियो देखा है और यह “दुर्भाग्यपूर्ण तथा निंदनीय” है। किसी भी धर्म की मान्यताओं और आस्थाओं को ठेस पहुंचाने वाले बयान इस तरह नहीं दिए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि योग और नमाज की तुलना करना तथा भगवद गीता के संदर्भ में इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने मौलाना जरजिस अंसारी से अपना बयान वापस लेने और माफी मांगने की अपील की।
वहीं, कोलकाता एयरपोर्ट की 136 साल पुरानी बांकरा मस्जिद में प्रवेश पर रोक लगाए जाने के मुद्दे पर इस्लामिक सेंटर के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों के एयरपोर्ट पर यात्रियों के लिए अलग से प्रेयर रूम और नमाज की व्यवस्था होती है। भारत में भी कई हवाई अड्डों पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो और वे निर्धारित स्थान पर धार्मिक गतिविधियां कर सकें।
मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि कोलकाता एयरपोर्ट परिसर में मौजूद मस्जिद को हटाने या वहां नमाज पर रोक लगाने की मांग संविधान की भावना के खिलाफ है।
उन्होंने कहा कि किसी धार्मिक स्थल को हटाना या धार्मिक पहचान से जुड़े मामलों में एकतरफा कदम उठाना समाज में गलत संदेश देता है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे फैसलों से मुसलमानों की पहचान को लेकर चिंता पैदा होती है।
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Created On :   17 July 2026 5:18 PM IST












