विश्व टीबी दिवस इस बीमारी को खत्म करना सिर्फ सपना नहीं, अब जागरुकता से इलाज संभव

विश्व टीबी दिवस  इस बीमारी को खत्म करना सिर्फ सपना नहीं, अब जागरुकता से इलाज संभव
टीबी एक गंभीर और संक्रामक बीमारी है, जो अगर समय पर इलाज न मिले तो गंभीर रूप ले सकती है। टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक मुख्य रूप से हवा के जरिए फैलती है। जब कोई व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो उसके शरीर में मौजूद माइक्रोबैक्टीरिया हवा में फैल जाते हैं। आसपास के लोग, खासकर जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें सांस के जरिए अपने शरीर में ले लेते हैं और इससे संक्रमण फैल सकता है।

नई दिल्ली, 23 मार्च (आईएएनएस)। टीबी एक गंभीर और संक्रामक बीमारी है, जो अगर समय पर इलाज न मिले तो गंभीर रूप ले सकती है। टीबी मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करती है और यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक मुख्य रूप से हवा के जरिए फैलती है। जब कोई व्यक्ति खांसता, छींकता या बात करता है, तो उसके शरीर में मौजूद माइक्रोबैक्टीरिया हवा में फैल जाते हैं। आसपास के लोग, खासकर जिनकी इम्यूनिटी कमजोर होती है, उन्हें सांस के जरिए अपने शरीर में ले लेते हैं और इससे संक्रमण फैल सकता है।

हर साल 24 मार्च को पूरे विश्व में टीबी दिवस मनाया जाता है ताकि लोगों को टीबी के खतरे, सावधानी और उपचार के महत्व के बारे में जागरूक किया जा सके। समय पर इलाज और सही सावधानी अपनाने से यह बीमारी पूरी तरह नियंत्रित की जा सकती है। संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनना, संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाए रखना और समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बहुत जरूरी है। टीबी का इलाज लंबा हो सकता है लेकिन पूरी दवा और उपचार समय पर लेने से मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है।

विश्व टीबी दिवस 2026 का थीम है "हां, हम टीबी को खत्म कर सकते हैं।" अगर सरकार, स्वास्थ्य संगठन, डॉक्टर्स और समाज मिलकर जागरुकता फैलाएं, निवेश करें और सहयोग करें, तो टीबी जैसी संक्रमक बीमारी को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। यह थीम उम्मीद और कार्रवाई का संदेश देती है। अगर देशों के नेता, नीति निर्माता और आम लोग मिलकर काम करें, नई डब्ल्यूएचओ सिफारिशों और तकनीकों को अपनाएं, और मजबूत सहयोग करें, तो टीबी को खत्म करना असंभव नहीं है।

यह दिन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि 24 मार्च 1882 को रॉबर्ट कोच ने माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की खोज की थी। इस खोज ने टीबी के निदान और उपचार में नई राह खोली। इसी कारण 1982 में डब्ल्यूएचओ और इंटरनेशनल यूनियन अगेंस्ट ट्यूबरकुलोसिस एंड लंग डिजीज ने 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की। यह दिन सिर्फ बीमारी के बारे में जागरूकता फैलाने का नहीं है बल्कि टीबी के खिलाफ सामूहिक प्रयास और सहयोग को प्रोत्साहित करने का भी है।

इसके अलावा, टीबी के इलाज में सही खानपान और जीवनशैली भी मददगार होती है। प्रोटीन, विटामिन और आयरन युक्त आहार रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं और शरीर को संक्रमण से लड़ने में सक्षम बनाते हैं। टीबी मरीजों को धूम्रपान और शराब से दूर रहना चाहिए।

अस्वीकरण: यह न्यूज़ ऑटो फ़ीड्स द्वारा स्वतः प्रकाशित हुई खबर है। इस न्यूज़ में BhaskarHindi.com टीम के द्वारा किसी भी तरह का कोई बदलाव या परिवर्तन (एडिटिंग) नहीं किया गया है| इस न्यूज की एवं न्यूज में उपयोग में ली गई सामग्रियों की सम्पूर्ण जवाबदारी केवल और केवल न्यूज़ एजेंसी की है एवं इस न्यूज में दी गई जानकारी का उपयोग करने से पहले संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों (वकील / इंजीनियर / ज्योतिष / वास्तुशास्त्री / डॉक्टर / न्यूज़ एजेंसी / अन्य विषय एक्सपर्ट) की सलाह जरूर लें। अतः संबंधित खबर एवं उपयोग में लिए गए टेक्स्ट मैटर, फोटो, विडियो एवं ऑडिओ को लेकर BhaskarHindi.com न्यूज पोर्टल की कोई भी जिम्मेदारी नहीं है|

Created On :   23 March 2026 3:53 PM IST

Tags

और पढ़ेंकम पढ़ें
Next Story