युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड मापुटो बंदरगाह से रवाना, मोजाम्बिक को सौंपी मदद

युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड मापुटो बंदरगाह से रवाना, मोजाम्बिक को सौंपी मदद
भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड ने मोजाम्बिक की यात्रा पूरी कर ली है। यह भारतीय युद्धपोत मोजाम्बिक के मापुटो बंदरगाह की अपने अगले गंतव्य के लिए प्रस्थान कर चुका है।

नई दिल्ली, 31 मार्च (आईएएनएस)। भारतीय नौसेना के अग्रिम पंक्ति के गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट आईएनएस त्रिकंड ने मोजाम्बिक की यात्रा पूरी कर ली है। यह भारतीय युद्धपोत मोजाम्बिक के मापुटो बंदरगाह की अपने अगले गंतव्य के लिए प्रस्थान कर चुका है।

मंगलवार को इस विषय में जानकारी देते भारतीय नौसेना ने बताया कि यहां भारत और मोजाम्बिक की नौसेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और पेशेवर गतिविधियां आयोजित की गईं।

दरअसल भारतीय नौसेना का युद्धपोत आईएनएस त्रिकंड हाल ही में अफ्रीकी देश मोजाम्बिक के मापुटो बंदरगाह की यात्रा पर गया था। 29 मार्च को यह यात्रा पूरी हुई जिसके बाद युद्धपोत वहां से रवाना हो गया।

नौसेना का मानना है कि यह सिर्फ एक औपचारिक दौरा नहीं था, बल्कि दोनों देशों के बीच दोस्ती और सहयोग को और मजबूत करने का एक अहम मौका था। जब जहाज मापुटो में रुका हुआ था, तब भारतीय नौसेना और मोजाम्बिक नौसेना के बीच कई तरह की ट्रेनिंग और साझा गतिविधियां हुईं। इनका मकसद यह था कि दोनों देश मिलकर समुद्र में सुरक्षा के मामलों में बेहतर तालमेल बना सकें और जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे के साथ आसानी से काम कर सकें।

इस यात्रा में भारत की तरफ से मोजाम्बिक को मदद भी दी गई। मानवीय सहायता और आपदा राहत के तहत जरूरी सामान सौंपे गए। यह कार्यक्रम बड़े अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ, जिसमें मोजाम्बिक के स्वास्थ्य मंत्री, भारत के उच्चायुक्त और कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।

इसके अलावा, एक मेडिकल कैम्प भी लगाया गया, जहां स्थानीय लोगों को इलाज और स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं। वहीं जहाज के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन सचिन कुलकर्णी ने भी भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की और दोनों देशों के रिश्तों को लेकर बातचीत की। वापस लौटने से पहले आईएनएस त्रिकंड ने मोजाम्बिक नौसेना के कुछ जवानों को अपने साथ लेकर समुद्र में संयुक्त अभ्यास किया। इसमें समुद्र के विशेष आर्थिक क्षेत्र की निगरानी और अन्य ट्रेनिंग शामिल थी। इससे दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच भरोसा और समझ और मजबूत हुई।

रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक यह दौरा भारत की उस सोच का प्रतीक है जिसमें वह हिंद महासागर क्षेत्र में अपने दोस्तों के साथ मिलकर सुरक्षा और विकास के लिए काम करना चाहता है। भारत खुद को एक भरोसेमंद साथी और मुश्किल समय में सबसे पहले मदद करने वाले देश के रूप में स्थापित कर रहा है। यह यात्रा उसी दिशा में एक और मजबूत कदम है।

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Created On :   31 March 2026 2:41 PM IST

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