जीरो ग्रैविटी में एस्ट्रोनॉट्स कैसे पीते हैं पानी? जानिए क्या है जीरो-जी कप

जीरो ग्रैविटी में एस्ट्रोनॉट्स कैसे पीते हैं पानी? जानिए क्या है जीरो-जी कप
स्पेस में माइक्रोग्रैविटी का माहौल होता है। यहां गुरुत्वाकर्षण इतना कम होता है कि पानी या कोई भी तरल पदार्थ गिरता नहीं, बल्कि गेंद जैसा बन जाता है या चारों तरफ तैरने लगता है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर रह रहे एस्ट्रोनॉट्स के लिए सामान्य कप से पानी पीना असंभव है, क्योंकि तरल छलककर हवा में उड़ने लगता है।

नई दिल्ली, 29 मार्च (आईएएनएस)। स्पेस में माइक्रोग्रैविटी का माहौल होता है। यहां गुरुत्वाकर्षण इतना कम होता है कि पानी या कोई भी तरल पदार्थ गिरता नहीं, बल्कि गेंद जैसा बन जाता है या चारों तरफ तैरने लगता है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (आईएसएस) पर रह रहे एस्ट्रोनॉट्स के लिए सामान्य कप से पानी पीना असंभव है, क्योंकि तरल छलककर हवा में उड़ने लगता है।

पहले एस्ट्रोनॉट्स पानी पीने के लिए प्लास्टिक के पाउच का इस्तेमाल करते थे। एक ट्यूब या नोजल से जुड़े पाउच में तरल भरा होता है और वे उसे चूसकर पीते थे। यह तरीका सुरक्षित तो है, लेकिन काफी असुविधाजनक लगता है। एस्ट्रोनॉट्स को कॉफी या चाय का स्वाद और खुशबू भी ठीक से नहीं मिल पाती।

अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने सूझ-बूझ ने इस समस्या का समाधान निकाला है। नासा के एस्ट्रोनॉट डॉन पेटिट ने माइक्रोग्रैविटी में पीने के लिए खास ‘जीरो-जी कप’ या स्पेस कप का आविष्कार किया। यह कप एस्ट्रोनॉट्स को पृथ्वी जैसा यानी बिना स्ट्रॉ के कप से सीधे घूंट लेकर पीने का अनुभव देता है।

एस्ट्रोनॉट्स बताते हैं कि जीरो-जी कप क्या है और यह कैसे काम करता है? जीरो-जी कप प्लास्टिक का बना एक खास आकार का छोटा कंटेनर है। यह ट्रेडिंग कार्ड से थोड़ा बड़ा होता है। कप का डिजाइन टीयर ड्रॉप जैसा होता है, जिसमें अंदर की तरफ एक तेज धार वाली संकरी नाली या चैनल होती है। माइक्रोग्रैविटी में गुरुत्वाकर्षण की जगह सतह तनाव और केपिलरी एक्शन काम करते हैं। जब कप में पानी डाला जाता है तो वह कप की तली से चिपक जाता है। संकरी दीवारों और चैनल के कारण पानी सतह तनाव की मदद से ऊपर की ओर चढ़ने लगता है। यह पानी कप के किनारे तक पहुंच जाता है, जहां से इसे आसानी से घूंट लिया जा सकता है।

कप को होठों तक उठाकर सामान्य तरीके से सिप करने पर तरल अपने आप किनारे पर आ जाता है। एक घूंट लेने के बाद सतह तनाव का संतुलन बिगड़ता है और नीचे से और पानी चैनल में ऊपर आ जाता है। इस तरह पूरा तरल बिना बर्बाद हुए पीया जा सकता है। कप छलकने वाला भी नहीं है, यानी सामान्य हलचल में तरल बाहर नहीं निकलता।

डॉन पेटिट ने आईएसएस पर रहते हुए इस कप का प्रोटोटाइप खुद बनाया था। बाद में नासा ने इसे और बेहतर बनाया। यह डिजाइन भौतिकी के नियमों खासकर केपिलरी फ्लो पर आधारित है। एस्ट्रोनॉट्स अब कॉफी, चाय या पानी को खुशबू लेते हुए कप से पीने का आरामदायक अनुभव कर सकते हैं।

जीरो-जी कप न सिर्फ सुविधा बढ़ाता है, बल्कि एस्ट्रोनॉट्स के मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा है।

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Created On :   29 March 2026 12:16 PM IST

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