उत्तरप्रदेश न्यूज: अखिलेश यादव ने फिर बदला PDA का अर्थ, पी को प्रोटेस्ट ,डी को डेमोंस्ट्रेशन और ए को एक्टिविस्ट कहा, मायावती रंग बदलने का लगा चुकी है आरोप

अखिलेश यादव ने फिर बदला PDA का अर्थ, पी को प्रोटेस्ट ,डी को डेमोंस्ट्रेशन और ए को एक्टिविस्ट कहा, मायावती रंग बदलने का लगा चुकी है आरोप
2024 के लोकसभा चुनावों में PDA फार्मूले के आधार पर समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था। पार्टी अब टाइम टाइम पर PDA का दायरा बढ़ा रही है।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। उत्तरप्रदेश में कुछ महीनों बाद विधानसभा चुनाव है, ऐसे में वहां जातिगत समीकरण से लेकर सियासी समीकरण की नई नई परिभाषा गढ़ी जा रही है और बदली जा रही है। आज समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने पीडीए का कुछ और अर्थ बता दिया। पूर्व सीएम यादव ने PDA में पी को प्रोटेस्ट ,डी को डेमोंस्ट्रेशन और ए को एक्टिविस्ट कहा। सपा चीफ ने आगे कहा PDA यानि प्रोटेस्ट करने वाले लोग, डेमोंस्ट्रेशन करने वाले लोग और एक्टिविस्ट जो अपनी बात रखना चाहते हैं। सपा प्रमुख ने इसी फॉर्मूले के जरिए सरकार बनाने की बात कही। अखिलेश यादव ने आगे कहा एक साथी ने मुझसे कहा कि अगर आप धैर्य रखेंगे, हमारे अंदर अनुशासन होगा तो आपकी PDA की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता है।

PDA फार्मूला समाजवादी पार्टी का मुख्य राजनीतिक और सामाजिक समीकरण है। इसके जरिए सपा यूपी और राष्ट्रीय राजनीति में सामाजिक न्याय और परिवर्तन की बात करती है। PDA में P का अर्थ पिछड़ा ,D यानि दलित ,A मतलब अल्पसंख्यक है।

2024 के लोकसभा चुनावों में PDA फार्मूले के आधार पर समाजवादी पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया था। पार्टी अब इसका दायरा बढ़ा रही है। सपा ने अपने पीडीए में टाइम टाइम पर पीड़ित वर्गों को भी जोड़ने के संदेश दिए हैं। हालांकि सपा का राजनीतिक फार्मूला भारतीय जनता पार्टी के हिंदुत्व के खिलाफ एक मुख्य राजनीतिक काट माना जाता है। लेकिन जब सपा ने पीडीए में पिछड़े के पी को 'पंडित' बताया तो बीएसपी चीफ मायावती ने सपा को 'गिरगिट की तरह रंग बदलने वाली पार्टी' और उसके सियासी फॉर्मूले को चुनावी छलावा बताया। मायावती ने इसे चुनावी स्वार्थ और संकीर्ण जातिवादी राजनीति बताया।

Created On :   29 Aug 2026 4:44 PM IST

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