VB-G RAM G: कर्नाटक सरकार की कैबिनेट ने रोजगार के नए कानून पर बड़ा फैसला, लागू करने से किया इनकार, कोर्ट में देंगे चुनौती

कर्नाटक सरकार की कैबिनेट ने रोजगार के नए कानून पर बड़ा फैसला, लागू करने से किया इनकार, कोर्ट में देंगे चुनौती
कर्नाटक सरकार ने वीबी-जी-राम जी बिल पर बड़ा फैसला लिया है। इसे राज्य में लागू नहीं किया जाएगा। प्रदेश के कानून एवं संसदीय कार्या मंत्री एचके पाटिल ने आज गुरुवार को बताया कि इस अधियान को स्वीकार नहीं किया जाएगा

डिजिटल डेस्क, बेंगलुरु। कर्नाटक सरकार ने वीबी-जी-राम जी बिल पर बड़ा फैसला लिया है। इसे राज्य में लागू नहीं किया जाएगा। प्रदेश के कानून एवं संसदीय कार्या मंत्री एचके पाटिल ने आज गुरुवार को बताया कि इस अधियान को स्वीकार नहीं किया जाएगा और जो यूपीए सरकार के टाइम शुरू की गई ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा की लागू रहेगी। उन्होंने आगे बताया कि इस नए कानून के खिलाफ कोर्ट में कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।

मंत्री एचके पाटिल ने बताया कि कैबिनेट की मीटिंग में यह फैसला लिया गया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MANREGA) को केंद्र सरकार ने खत्म कर दिया है और उसकी जगह विकसित भारत-रोजगार और आजीविका के लिए गारंटी मिशन (VB-G Ram Ji) अधिनियम को लागू किया है। इसके खिलाफ 'जनता की अदालत' में पहुंचेंगे।

वैध अधिकारों को करता है कमजोर

कर्नाटक सरकार कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णय की जानकारी देते हुए पाटिल ने कहा, "सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया है कि वीबी-जी राम जी अधिनियम को स्वीकार नहीं किया जाएगा और इसे कानून की अदालत में चुनौती दी जाएगी। इस मुद्दे पर तैयार कैबिनेट प्रस्ताव में कहा गया कि वीबी-जी राम जी अधिनियम भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत दिए गए काम और आजीविका के अधिकार का उल्लंघन करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि यह कानून संविधान की ओर से पंचायतों को दिए गए वैध अधिकारों को कमजोर करता है और संविधान के 73वें और 74वें संशोधनों की भावना के खिलाफ है। स्थानीय जरूरतों के अनुसार नीचे से ऊपर की योजना बनाने की प्रक्रिया को इससे नुकसान पहुंचा है।"

केंद्र सरकार ने लिया एकतरफा फैसला

मंत्री ने यह भी बताया कि यह कानून संघीय ढांचे को गंभीर रूप से प्रभावित करने का काम करता है, क्योंकि इसमें केवल राज्यों को परामर्श प्रक्रिया में पूरी तरह से बाहर रखा गया है, बल्कि उनसे कुल खर्च का 40 प्रतिशत वहन करने की बात भी की गई है। केंद्र सरकार ने किसी भी राज्य को भरोसे में नहीं लेते हुए एकतरफा नियम शर्तों अपने अनुसार लगाए हैं।

उन्होंने आगे बताया कि इस नए अधिनियम से ग्रामीण इलाकों मे रहने वाले लोगों के सामाजिक और आर्थिक अधिकारों पर गंभीर चोट पहुंचा है। इसके अनुसार उन्हीं इलाकों को काम मिलेगा, जिन्हें केद्र सरकार अधिसूचित करेगी। इसके अलावा, उनकी मजदूरी भी केंद्र सरकार तय करेगी। इसमें राज्य सरकारों की तरफ से तय न्यूनतम मजदूरी की कोई गारंटी नहीं है।

पंचायतों को नहीं मिलेगी आजादी

संसदीय कार्या मंत्री ने बताया कि यह कानून महात्मा गांधी की 'ग्राम स्वराज' की कल्पाना के अनुरुप नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि पंचायतों न तो स्थानीय जरूरतों के अनुसार काम करने की आजादी मिलेगी और न ही कामों की प्राथमिकता तय करने का अधिकार मिलेगा। उन्हें केवल केंद्र सरकार की तरफ से तय किए मानकों तक ही सीमित रहना होगा।

Created On :   8 Jan 2026 9:02 PM IST

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