फिर दोहराया इतिहास: जिस तरह छोड़ा था कांग्रेस का हाथ, TMC नेताओं ने उसी तरह छोड़ा साथ, ममता का सियासी पास्ट बना बंगाल का प्रेजेंट पॉलिटिकल सिनारियो?

जिस तरह छोड़ा था कांग्रेस का हाथ, TMC नेताओं ने उसी तरह छोड़ा साथ, ममता का सियासी पास्ट बना बंगाल का प्रेजेंट पॉलिटिकल सिनारियो?
टीएमसी इस समय अंदरूनी संकट से गुजर रही है। कई विधायक और सांसद नाराज बताए जा रहे हैं। पार्टी में बढ़ते मतभेद आने वाले समय में बड़ा राजनीतिक असर डाल सकते हैं।

डिजिटल डेस्क, कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने सबसे मुश्किल दौर से गुजर रही है। पार्टी के कई विधायक और सांसद नेतृत्व से नाराज बताए जा रहे हैं। बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक मजबूत रही टीएमसी अब अंदरूनी खींचतान का सामना कर रही है। दिलचस्प बात यह है कि जिस तरह कभी ममता बनर्जी ने अपनी अलग पार्टी बनाई थी, आज उसी पार्टी में टूट की चर्चा हो रही है। राजनीतिक हलकों में इस घटनाक्रम पर लगातार नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में पार्टी के लिए यह स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

कांग्रेस से शुरू हुआ राजनीतिक सफर

ममता बनर्जी ने छात्र राजनीति से अपने पॉलिटिकल करियर की शुरुआत की थी। बाद में वह कांग्रेस पार्टी से जुड़ीं और धीरे-धीरे एक चर्चित नेता बन गईं। साल 1984 में वह पहली बार कांग्रेस के टिकट पर पश्चिम बंगाल की जाधवपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ीं और जीत हासिल की।

वाम दलों के खिलाफ बढ़ी लड़ाई

समय के साथ ममता बनर्जी का वाम दलों के खिलाफ संघर्ष तेज हो गया। उनका मानना था कि कांग्रेस उनकी राजनीतिक लड़ाई में पूरा साथ नहीं दे रही है। साथ ही, पार्टी द्वारा नजरअंदाज किए जाने की उनके मतभेद बढ़ने लगे।

नई पार्टी का गठन

दिसंबर 1997 में आधिकारिक तौर पर कांग्रेस से अलग होने के बाद ममता बनर्जी ने अपने सहयोगियों के साथ नई पार्टी बनाने का फैसला किया। साल 1998 में तृणमूल कांग्रेस की शुरुआत हुई। इसके बाद पार्टी ने बंगाल की राजनीति में तेजी से अपनी पहचान बनाई।

2011 में मिली बड़ी सफलता

वर्ष 2011 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने शानदार प्रदर्शन कर सत्ता हासिल कर ली। इसके बाद 2016 और 2021 का भी विधानसभा चुनाव जीत कर ममता बनर्जी ने 15 सालों तक बंगाल पर राज किया। हालांकि, 2026 में भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया।

अब पार्टी में बढ़ रही है नाराजगी

विधानसभा चुनाव 2026 हारने के बाद टीएमसी के भीतर मतभेद की खबरें सामने आने लगी हैं। कई नेताओं और विधायकों के पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाने की चर्चा हो रही है। कुछ नेताओं पर कार्रवाई भी की गई है जिससे नाराजगी और बढ़ा गई है।

सांसदों में भी दिख रहे बगावत के संकेत

अब पार्टी के कुछ सांसदों ने अलग रुख अपना लिया है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि टीएमसी के करीब 60 विधायक संगठन के खिलाफ कदम उठाने की तैयारी में हैं और अपना अलग गुट बना सकते हैं। यदि ऐसा होता है तो ममता बनर्जी की मुश्किलें काफी बढ़ जाएंगी।

Created On :   9 Jun 2026 4:12 PM IST

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