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Bhopal News: कुछ जिलों में अल्प वर्षा और कुछ में बाढ़ की आशंका की समीक्षा की, सीएम ने हर जिले में तैयारी रखने के निर्देश दिए

डिजिटल डेस्क, भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मानसून में प्रदेश में औसत से 15 प्रतिशत कम वर्षा होने पर और कुछ जिलों में बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग, सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके शामिल रहे, जबिक पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल, ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर और कृषि मंत्री एन्दल सिंह कषाना वर्चुअल जुड़े। मुख्यमंत्री ने कम वर्षा और अिधक वर्षा की परिस्थितियों को लेकर मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए कि हालातों से निपटने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां कर लें।
दरअसल, प्रदेश में 1 जून से 10 अगस्त तक सामान्य वर्षा 571 मिली मीटर की तुलना में 483 मिली मीटर रिकॉर्ड की गई है। यह औसतन 15 प्रतिशत कम है। समीक्षा में बताया गया कि प्रदेश में पूर्वी मप्र में 513.20 मिलीमीटर और पश्चिम मप्र में 459.80 मिलीमीटर वर्षा हुई है। प्रदेश की कुल औसत वर्षा 949. 50 मि.मी. है। 84 प्रतिशत बोवनी (धान) प्रदेश में हो चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि एहतियात बरती जाए कि आने वाले रबी सीजन में ऐसी फसलों के लिए किसानों को प्रेरित करें, जिसमें पानी कम लगे। विशेष रूप से चने की फसल के लिए बीज की उपलब्धता तय की जाए।
ये तैयारी रखने के दिए निर्देश
- वर्षा की स्थिति और जल संग्रहण की नियमित निगरानी हो।
- प्रमुख जल स्रोतों तालाबों के जलस्तर की भी नियमित रूप से निगरानी की जाए।
- राज्य और जिला स्तर पर आपदा कंट्रोल रूम संचालित रहे जहां जल भराव और क्षति से जुड़ी सूचनाओं को दर्ज करें। जल भराव या बाढ़ संभावित क्षेत्रों से नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का आकलन किया जाए।
- अतिवृष्टि की स्थिति में राहत शिविरों का भी आवश्यकता के अनुसार प्रबंध किया जाए।
- किसानों के लिए खाद और बीज की उपलब्धता और आवश्यक तैयारी की जाए।
- बीमा योजना से अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाए।
- सिंचाई के दौरान सुचारू विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था रहे।
- वर्षा के उपरांत सड़कों के संधारण का कार्य भी सुचारू रूप से किया जाए।
- बांधों से जल छोड़े जाने की स्थिति में निचले इलाकों में समय रहते चेतावनी जारी की जाए।
- वर्षा काल में होने वाले संक्रामक रोगों की रोकथाम करें। जिलों में दवाइयों की उपलब्धता रखें।
- अतिवृष्टि या जल भराव से प्रभावित फसलों का राजस्व विभाग के दलों द्वारा पारदर्शिता से सर्वेक्षण हो। क्षति का सर्वे करें।
- कालाबाजारी की शिकायतों पर तत्काल कदम उठाया जाए।
बांधों की स्थिति
प्रदेश के बांधों में 10 अगस्त तक जलभराव की स्थिति लगभग 49 प्रतिशत है, जो औसत से 10 प्रतिशत कम है। बीते 5 साल में 59 प्रतिशत औसत जल भराव की स्थिति रही है। पिछले साल जल भराव की स्थिति 75 प्रतिशत थी। 36 ऐसे जलाशय है जिनमें जल भराव 50 प्रतिशत या उससे कम है। जबकि प्रदेश के ऐसे 18 जलाशय में जलभराव 50 से 90 प्रतिशत कम है।
Created On :   11 Aug 2026 10:21 PM IST












