दैनिक भास्कर हिंदी: रूबेला का टीका लगाने के बाद बिगड़ी हालत, 1 की मौत 3 गंभीर

December 12th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर। भंडारा जिले में रूबेला टीका लगाने के बाद तबीयत बिगड़ने के कारण मंगलवार को एक और बालक को शासकीय मेडिकल अस्पताल में भर्ती करना पड़ा। इससे पहले 3 बालकों को भर्ती कराया जा चुका है। इसमें से एक बालिका ने 3 दिन पहले उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। भर्ती किए गए सभी बालक भंडारा जिले के हैं। 

आईसीयू में भर्ती : भंडारा जिले के लाखांदूर तहसील अंतर्गत कालेपेंढरी निवासी ईशांत गजघाटे (4) को शासकीय मेडिकल अस्पताल लाया गया। पहले उसे वार्ड क्रमांक 3 में भर्ती किया गया था। नाजुक हालात देख बाद में आईसीयू में भर्ती किया गया है। 

पूरे प्रदेश में मुहिम : रूबेला टीकाकरण मुहिम संपूर्ण महाराष्ट्र में चलाई जा रही है। 9 महीने से 15 वर्ष तक की उम्र के सभी बच्चों को ये टीके लगाए जा रहे हैं। 

आराध्या पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा खुलासा 
भंडारा जिले में पिछले 3 दिन में 4 बालकों की तबीयत बिगड़ने से टीकाकरण में खामी की चर्चा है। इसमें से एक बालिका ने 3 दिन पहले उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सच सामने आएगा। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही लाखनी तहसील के लाखोड़ी ग्राम निवासी रंजीत वाघाये की पुत्री आराध्या ने उपचार के दौरान शासकीय मेडिकल अस्पताल में 3 दिन पूर्व दम तोड़ दिया था। उसे भंडारा के जिला सामान्य अस्पताल से नागपुर रेफर किया गया था। 

उसके बड़े पिता धनराज वाघाये ने बताया कि 5 दिसंबर को उसे आंगनवाड़ी में रूबेला टीका लगाया गया और तुरंत घर भेज दिया गया। रास्ते में ही उसे उल्टियां होने लगीं। घर पहुंचने के बाद दस्त की शिकायत शुरू हो गई। टीका लगाने के लिए गांव में आई परिचारिका को तत्काल सूचना दी गई। परिचारिका उसे देखने के लिए घर आई, लेकिन बिना कोई उपचार किए वापस चली गई। तबीयत ठीक नहीं होने पर दूसरे दिन सुबह लाखनी स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ले जाया गया। 

डॉक्टर ने जांच कर तुरंत जिला सामान्य अस्पताल भंडारा ले जाने की सलाह दी। भंडारा पहुंचने तक तबीयत और खराब हो गई। सांस लेने में तकलीफ होने लगी तो ऑक्सीजन लगाया गया। एक घंटे बाद नागपुर मेडिकल अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। मेडिकल में दूसरे दिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। परिवार का आरोप है कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के चलते उनकी पुत्री की जान चली गई। आराध्या के पिता रंजीत वाघाये पेशे से पेंटर हैं। वे अधिकांश समय गोवा में रहते हैं। आराध्या उनकी इकलौती पुत्री थी।

जानकार बताते हैं जिन बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता कम रहती है, उन्हें टीका लगाने के बाद बुखार आने की आशंका बनी रहती है। ऐसे बच्चों का प्रमाण मुश्किल से 5 प्रतिशत है। वहीं 10 लाख बच्चों में एक की मृत्यु का प्रमाण है। 

रिपोर्ट  
टीका लगाने के बाद बालकों की तबीयत खराब होने के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है। बुधवार को पूरी जानकारी मिल जाएगी। 
-डॉ. प्रशांत उइके, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, भंडारा

एक घंटा डॉक्टर की निगरानी में रखने के निर्देश
रूबेला टीका लगाने के बाद बालक को एक घंटा डॉक्टर की ​निगरानी में रखने के दिशा-निर्देश हैं। बालक की प्रतिरोधक क्षमता कम रहने पर टीका लगाने के बाद प्रतिकूल परिणाम हो सकते हैं। है। ऐसी स्थिति में उसे समय पर उपचार देकर ठीक किया जा सकता है। 24 घंटे में यदि बुखार आता है, तो उसे पैरासिटामल अथवा क्रोसीन टैबलेट देने पर बुखार ठीक हो जाता है। अन्य कोई शिकायत होने पर तत्काल सरकारी अस्पताल में ले जाना चाहिए। रूबेला टीका लगाने पर आने वाली समस्या का उपचार करने की सरकारी अस्पतालों में पूरी व्यवस्था है।
-असिम ईनामदार, सहायक जिला स्वास्थ्य अधिकारी, जिप नागपुर