दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर में 160 ग्रीन जिम बनाने 11.12 करोड़ मिले, एक भी नहीं बने

February 17th, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए इम्युनिटी बढ़ाने सहित स्वास्थ्य पर अधिक जोर दिया जा रहा है। इसके लिए नागरिक अनेक तरीके अपना रहे हैं। कोई जिम जा रहा है तो कोई खुले में व्यायाम कर रहा है। इस बीच  शहर में ग्रीन जिम की मांग भी लगातार बढ़ते जा रही है। हालांकि महामारी आने से पहले ही शहर के खुले मैदानों में ग्रीन जिम, खुली व्यायामशाला लगाने के लिए जिला वार्षिक योजना में वर्ष 2019-20 के लिए  11 करोड़ 12 लाख रुपए की निधि मंजूर की गई थी। लेकिन साल बितने के बावजूद शहर के एक भी खुले मैदान में ग्रीम जिम नहीं लग पाए है। विशेष यह कि जिला क्रीड़ा अधिकारी, विभागीय क्रीड़ा संकुल ने अब तक ई-टेंडरिंग के लिए कोई प्रक्रिया का पालन तक नहीं किया है। ऐसे में कई सवाल उठ रहे हैं। एक तरह शहर में महामारी से लड़ने के लिए सरकार द्वारा स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान दे रही है। वहीं, प्रशासन है कि निधि मंजूर होने के बावजूद लोगों को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए कोई कदम नहीं उठा रहा है। 

जानबूझकर लटकाया काम 
ऐसा लग रहा है, जैसे अधिकारी और मनपा सत्तापक्ष के कुछ नगरसेवकों द्वारा यह काम नहीं करने दिया जा रहा है। इसे जानबूझकर लटकाया जा रहा है। मनपा सत्तापक्ष की मंशा है कि अगले वर्ष होने जा रहे मनपा चुनाव 2022 से पहले यह काम किया जाए, ताकि लोगों में संदेश जाए कि सत्तापक्ष ने शहर में काम किया है। कोरोना महामारी से लड़ने के लिए जनप्रतिनिधि और प्रशासन गंभीर नहीं है।  - रवींद्र घिधोड़े, संयोजक, रिसर्च एंड डेवलपमेंट विभाग 

स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को नजरअंदाज करने का आरोप
आम आदमी पार्टी, रिसर्च व डेवलपमेंट विभाग के संयोजक रवींद्र घिधोड़े ने सूचना के अधिकार अंतर्गत जिला क्रीड़ा अधिकारी से पिछले तीन साल में ग्रीन जिम बाबत जानकारी मांगी थी। जिला क्रीड़ा अधिकारी ने जानकारी में बताया कि वर्ष 2017-18 में जिला वार्षिक योजना अंतर्गत शहर में ग्रीन जिम के तहत 15 खुली व्यायामशाला का कार्य किया गया। इसमें 90 लाख रुपए खर्च किए गए थे। वर्ष 2018-19 में 4 करोड़ 32 लाख रुपए मंजूर किए गए। इस निधि से 64 जगह ग्रीम जिम और खुली व्यायामशाला के लिए साहित्य लगाए गए। वर्ष 2019-20 में 11 करोड़ 12 लाख रुपए खर्च को मंजूरी दी गई। इस निधि से 160 जगहों पर ग्रीम जिम के लिए साहित्य लगाने थे। लेकिन एक भी जगह साहित्य सामग्री नहीं लगाई गई। निधि जस की तस पड़ी है। ऐसे में जनप्रतिनिधि और अधिकारियों पर स्वास्थ्य से जुड़े विषयों को नजरअंदाज करने का आरोप लग रहा है।