दैनिक भास्कर हिंदी: नागपुर विभाग में बनाए 20 प्रोटेक्शन हट

December 16th, 2020

डिजिटल डेस्क, नागपुर। वन विभाग की ओर से कोरोना काल में हजारों ग्राम निवासियों को रोजगार दिया गया। जिससे एक ओर वन विभाग की गतिविधियां भी पूरी हुईं, वहीं काम के लिए तरस रहे लोगों को राेजगार नसीब हुआ। इसमें सबसे महत्वपूर्ण प्रोटेक्शन हट (झोपड़ी) रहा है। जिससे एक ओर 80 लोगों को रोजगार दिया गया, वहीं दूसरी ओर इनकी मदद से बाघों की गतिविधियों पर नजर रखते हुए अवैध शिकार के मामलों को रोकने में मदद मिली। इसके अलावा तेंदूपत्ता कलेक्शन, प्लांटेशन, नर्सरी व वनामति के माध्यम से 20 हजार के करीब ग्राम निवासियों को रोजगार दिया गया। जिससे कोरोनाकाल में ग्रामीणों का घर चल सका। 

3 हजार लोगों को प्लांटेशन का काम
राज्य सरकार की ओर से 33 करोड़  पौधे लगाने का संकल्प लिया गया है। जिसके आधार पर हर जगह अपने-अपने स्तर पर पौधारोपण भी किया जा रहा है। नागपुर विभाग की बात करें तो कोरोना काल में 3 हजार लोगों को प्लांटेशन का काम दिया गया। जिसके बदले उन्हें प्रतिदिन की मजदूरी भी दी जाती  है। 

15 हजार को तेंदूपत्ता से मिला रोजगार
नागपुर विभाग अंतर्गत कोरोना संक्रमण के दौरान 15 हजार ग्राम निवासियों को तेंदूपत्ता कलेक्शन का काम दिया गया। बीड़ी बनाने के लिए लगने वाले पत्तों का वन विभाग ने ग्राम के निवासियों के माध्यम से कलेक्शन किया। जिसके लिए प्रतिदिन उन्हें मजदूरी दी गई। इसके बाद ग्राम निवासियों को तेंदूपत्ता बिक्री से बोनस भी दिया गया। 

ग्राम के प्रोडक्ट को बेचने के लिए प्लेटफार्म
वन विभाग की ओर से नागपुर विभाग के पौनी, सलई, सावनी, कटाई, आमगांव, शीतलवाड़ी आदि ग्राम निवासियों को अपने गांव में बनाए जाने वाले प्रोडक्ट को बेचने के लिए प्लेटफार्म उपलब्ध कराया गया है। कोरोना काल में इस काम ने गांव के कई लोगों को रोजगार दिया। जिसमें ग्राम निवासी ने गांव में मिलने वाले फल, पौधों से अचार, कैडी, जूस आदि बनाकर वन विभाग के माध्यम से शहरों में लाकर बेचकर रोजगार पाया।

आगे भी देंगे रोजगार
हमारी ओर से कोरोना काल में 20 हजार से ज्यादा ग्राम निवासियों को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रोजगार दिए गए। आगे भी इसी तरह उन्हें रोजगार उपलब्ध कराने का संकल्प है। 
-डॉ. प्रभुनाथ शुकला, डीएफओ (प्रादेशिक) नागपुर

नई यजनाआंे से मिला लाभ
मार्च महीने के पहले तक सब कुछ ठीक था। रोजगार की बात करें, तो गांव हो या शहर हर किसी के लिए यह अच्छा खासा काम उपलब्ध था। लेकिन जैसे ही कोरोना संक्रमण ने दस्तक दी, पूरे देश में तालाबंदी घोषित कर दी गई। जिससे हजारों लोगों पर बेरोजगारी का संकट आ गया। खासकर ग्राम निवासियों के पास काम ही नहीं था। 

कोरोनाकाल में दिया वेतन
एनटीसीए के आंकड़े देखें तो इस साल बाघों की संख्या बढ़ी है। नागपुर जिले में भी इनकी संख्या बहुत ज्यादा है। इसके अलावा तेंदुए से लेकर अन्य वन्यजीवों की संख्या भी बढ़ी है। वन्यजीवों की संख्या बढ़ने के साथ ही जंगल में अापराधिक गतिविधियां भी बढ़ी हैं। अवैध शिकार के साथ ही कई वन्यजीव इंसानी इलाकों में पहुंच जाते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष भी बढ़ रहा था। ऐसे में वन विभाग ने मार्च से अक्टूबर में नागपुर विभाग में 20 प्रोटेक्शन हट बनाए। यह हट जंगलों के बीच थे। जहां 80 गांव के निवासियों को रहने का काम दिया। उनका काम वन्यजीवों की गतिविधियां समझना व अवैध शिकार को रोकना था। इससे एक ओर वन्यजीवों का सुरक्षा हुई, तो वहीं कोरोना काल में भी बेरोजगारों को काम मिल गया। वन विभाग इन मजदूरों को बतौर वेतन भी दे रहा है।