comScore

© Copyright 2019-20 : Bhaskarhindi.com. All Rights Reserved.

नागपुर जिले में जिला परिषद की 3 स्कूलों पर लगा ताला

नागपुर जिले में जिला परिषद की 3 स्कूलों पर लगा ताला

डिजिटल डेस्क,  नागपुर।  ग्रामीण क्षेत्रों में ज्ञान का दीपक जलाने के लिए छोटे-छोटे गांवों में जिला परिषद के स्कूल खोले गए। जिन स्कूलों में पढ़-लिखकर अनेक विद्यार्थी बड़े ओहदों पर पहुंचे भी हैं, आज उन्हीं स्कूलों को विद्यार्थी नहीं मिलने से बंद करने की नौबत आ गई है। इस वर्ष भिवापुर तहसील के (कलार), कुही तहसील के ब्राह्मणी और उमरेड तहसील के नांदरा जिला परिषद स्कूल पर ताला लगाना पड़ा है।

अंग्रेजी स्कूलों की ओर बढ़ रहा रुझान 
जिला परिषद स्कूल गरीबों की शिक्षा तक सिमटकर रह गए हैं। अंग्रेजी स्कूलों की ओर पालकों का रुझान बढ़ रहा है। अमीर वर्ग अपने बच्चों को मोटी फीस भरकर अंग्रेजी स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। गांव के बच्चे अंग्रेजी स्कूल में पढ़ने के लिए शहर में जाने से जिला परिषद स्कूल बंद हो रहे हैं। विद्यार्थी संख्या बढ़ाने की उपाययोजना करना छोड़ सरकार ने कम विद्यार्थी संख्या वाले स्कूलों का अन्य स्कूलों में समायोजन करने की नीति अपनाई है। पिछले 4 वर्ष में अनेक स्कूलों का समायोजन किया गया है। इस वर्ष 3 स्कूलों में एक भी विद्यार्थी ने प्रवेश नहीं लिया है जिसके कारण इन स्कूलों को बंद करना पड़ा है।

जिप स्कूलों की यह स्थिति
जिले में जिप के 1536 स्कूल हैं। इसमें से 380 स्कूलों की विद्यार्थी संख्या 20 के आसपास है। 30 स्कूल ऐसे हैं, जहां 5 या इससे भी कम विद्यार्थी है। जिला परिषद स्कूलों की विद्यार्थी संख्या दिन-ब-दिन कम हो रही है। 

डिजिटलाइजेशन का कोई उपयोग नहीं
विद्यार्थियों को आकर्षित करने के लिए जिला परिषद स्कूलों का डिजिटलाइजेशन पर जोर दिया जा रहा है। अनेक स्कूलों में टीवी, वीडियो स्क्रीन, डिजिटल बोर्ड उपलब्ध कराए गए हैं, लेेकिन इनका इस्तेमाल नहीं किए जाने से धूल खाते पड़े हैं। डिजिटलाइजेशन पर लाखों रुपए खर्च करने पर भी उपयोग नहीं किए जाने से विद्यार्थियों को कोई फायदा नहीं हो रहा है।

प्रशासन का तर्क
भिवापुर तहसील का कांद्री (कलार) गांव गोसेखुर्द प्रकल्प में चले जाने से स्कूल बंद करने का प्रस्ताव है। कुही तहसील का ब्राह्मणी गांव पुनर्वसित है जहां 20-22 परिवार रहते हैं। प्राथमिक स्कूल के लिए उस आयुु वर्ग के बालक नहीं होने से प्रवेश की संभावना नहीं है। उमरेड तहसील के नांदरा गांव के जिप स्कूल में पिछले वर्ष से एक भी विद्यार्थी का प्रवेश नहीं हुआ है। पालकों ने बच्चों को कान्वेंट में भर्ती कराया है।

कमेंट करें
E4ORx
NEXT STORY

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

Real Estate: खरीदना चाहते हैं अपने सपनों का घर तो रखे इन बातों का ध्यान, भास्कर प्रॉपर्टी करेगा मदद

डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

जानिए भास्कर प्रॉपर्टी के बारे में:
भास्कर प्रॉपर्टी ऑनलाइन रियल एस्टेट स्पेस में तेजी से आगे बढ़ने वाली कंपनी हैं, जो आपके सपनों के घर की तलाश को आसान बनाती है। एक बेहतर अनुभव देने और आपको फर्जी लिस्टिंग और अंतहीन साइट विजिट से मुक्त कराने के मकसद से ही इस प्लेटफॉर्म को डेवलप किया गया है। हमारी बेहतरीन टीम की रिसर्च और मेहनत से हमने कई सारे प्रॉपर्टी से जुड़े रिकॉर्ड को इकट्ठा किया है। आपकी सुविधाओं को ध्यान में रखकर बनाए गए इस प्लेटफॉर्म से आपके समय की भी बचत होगी। यहां आपको सभी रेंज की प्रॉपर्टी लिस्टिंग मिलेगी, खास तौर पर जबलपुर की प्रॉपर्टीज से जुड़ी लिस्टिंग्स। ऐसे में अगर आप जबलपुर में प्रॉपर्टी खरीदने का प्लान बना रहे हैं और सही और सटीक जानकारी चाहते हैं तो भास्कर प्रॉपर्टी की वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।