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एसटी के नए 83 कर्मचारियों को कागज पर ही काम

एसटी के नए 83 कर्मचारियों को कागज पर ही काम

डिजिटल डेस्क, नागपुर। महीनों बेरोजगारी की मार झेलने के बाद एसटी के नए कर्मचारियों को हाल ही में काम पर लौटने का फरमान मिलने के बाद उनमें खुशी की लहर दौड़ गई, लेकिन आज तक उन्हें काम नहीं मिल पाया है। इस बारे में प्रशासन का कहना है कि, परिवहन व्यवस्था केवल 25% ही शुरू है। स्थायी कर्मचारियों को ही काम देना संभव नहीं हो रहा है। ऐसे में नए 83 कर्मचारियों के लिए नाम का ही काम रह गया है। नागपुर विभाग अंतर्गत कुल 580 बसों का संचालन किया जाता था।

कोरोना संक्रमण से पूर्व कर्मचारियों की कमी को देखते हुए विभाग की ओर से चालक कम वाहक पद पर नई भर्ती की गई थी। जिसमें केवल नागपुर विभाग में 241 नए युवा कर्मचारी एसटी से जुड़ने वाले थे। इनकी खासियत यह है कि, यह कर्मचारी कंडक्टर के काम के साथ जरूरत पड़ने पर बस भी चला सकते हैं। नागपुर विभाग में कुल 83 युवाओं का चयन कर उनको एसटी ने काम पर रखा गया था। रोजंदारी गट के माध्यम से इन्हें काम दिया गया और 25 युवाओं को प्रशिक्षण देना जारी था। इन युवाओं को अगले छह माह में एसटी प्रशासन काम देने वाला था, लेकिन मार्च माह से कोरोना संक्रमण के चलते बसों के पहिये थम गए। 

वेतन के पड़े लाले
कर्मचारियों का वेतन निकालना भी मुश्किल हो गया। बसें कब चलेंगी यह भी तय नहीं था। ऐसे में नए कर्मचारियों को परिवहन आयुक्त ने फरमान जारी कर  घर बैठा दिया था। हाल ही में इन्हें वापस काम पर लेने के लिए कहा गया है, लेकिन इनका काम केवल नाम तक ही सीमित रह गया है। कुछ नए कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, उन्हें काम नहीं दिया जा रहा है। जब काम रहेगा, तब बुलाने की बात कही जा रही है। 

काम ही नहीं है
यात्रियों की संख्या कम होने के कारण केवल 25% बसें चलाई जा रही हैं। हमारे पास 1700 से ज्यादा कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियों को ही काम देना संभव नहीं हो पा रहा है, तो नए कर्मचारियों को कैसे काम दिया जाएगा।  - नीलेश बेलसरे, विभाग नियंत्रक, एसटी महामंडल, नागपुर
 

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