दैनिक भास्कर हिंदी: एक साल में गायब हुई रेलवे की 9 लाख की चादर व नैपकिन

November 26th, 2018

डिजिटल डेस्क, नागपुर।  सुनने में हैरानी होगी लेकिन मध्य रेलवे नागपुर मंडल की गाड़ियों में गत एक साल में 9 लाख की चादर व नैपकिन गायब हुई है। यह कहां गई इस बारे में खुद रेलवे को भी जानकारी नहीं है। हालांकि रेलवे इसका पैसा ठेकेदारों से वसूलने की बात कह रही है। हाल ही में रेलवे मंत्रालय ने खुलासा किया है, कि अब तक रेलवे से 21 लाख नैपकीन गायब हुए हैं, जिसकी कुल कीमत 14 करोड़ है। इसके लिए रेलवे मंत्रालय ने यात्रियों को दोष दिया है। हालांकि नागपुर के अधिकारी इसे लेकर चुप्पी साधे हैं।

मिलों तक सफर करनेवाली रेलवे गाड़ियों में जनरल, स्लीपर के साथ एसी-1, 2 व थर्ड बोगी होती है। एसी बोगियों में यात्रियों को बेडरोल दिया जाता है। जिसमें बिछाने के लिए चादर, ओढ़ने के लिए कंबल व हाथ, मुंह पौछने के लिए नैपकीन होता है। नियमानुसार यह सारी चीजें यात्रा खत्म होने के बाद कोच अटेंडेंट को वापस होनी चाहीए। कोच अटेंडेट ने भी इसे याद से वापस लेना जरूरी है। लेकिन कई कोच अटेंडेट की लापरवाही के कारण ऐसा नहीं हो पाता है। वहीं आरोप है, कि कई यात्री लापरवाहीवश इसे बैग में ही डालकर ले जाते या कहीं फेक जाते हैं।

यही वजह है कि लगातार नैपकीन व चादरें रेलवे से गायब होने का सिलसिला जारी है। नागपुर मंडल में दुरंतो, विदर्भ एक्सप्रेस, पुणे-नागपुर-पुणे, गरीबरथ आदि 12 से ज्यादा गाड़ियां है। जो नागपुर मंडल द्वारा संचालित होती है। इसके अलावा रोजाना मंडल से होकर जानेवाली गाड़ियों की संख्या भी अधिक है। आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 नवंबर माह से वर्ष 2018 के 25 नवंबर तक इन गाड़ियों से 4 हजार 5 सौ 58 चादरें व 4 हजार 7 सौ 33 नैपकीन गायब हुए हैं। एक चादर की कीमत 167 रुपये है, वहीं एक नैपकीन की कीमत 31 रुपये है। ऐसे में एक साल में कुल 7 लाख 61 हजार रुपये की चादरें गायब हुई है। वहीं 1 लाख 46 हजार रुपये के नैपकीन यानी तौलिया गायब हुए हैं।

नहीं कोई जानकारी 

रेलवे इसकी रिकवरी ठेकेदारों से करती है। जिनके माध्यम से बेडरोल बांटे जाते हैं। यह कहां जाते हैं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। ( एस.जी. राव, साहायक वाणिज्य प्रबंधक, मध्य रेलवे नागपुर मंडल)