अव्यवस्था: साइबर क्राइम के 90% मामले स्थानीय थानों में ही चल रहे

November 22nd, 2021

डिजिटल डेस्क, नागपुर। संतरानगरी में करीब दो साल पहले साइबर पुलिस थाना बनाया गया, जो आज भी स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। थाने के 16 कर्मचारियों के कंधों पर पूरे जिले की जिम्मेदारी है। साइबर पुलिस थाने के पास न तो कस्टडी रूम (लॉकअप) है और न ही बाहर से अपराधी को पकड़कर लाने के लिए कोई वाहन है। सिर्फ पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी के लिए एक वाहन है, जो उनके ही काम आता है। यही कारण है कि साइबर पुलिस थाने के 90 फीसदी मामले स्थानीय थानों की पुलिस के पास जांच के लिए भेज दिए जाते हैं। 10 फीसदी मामले समय रहते साइबर पुलिस सुलझा लेती है। साइबर पुलिस का मानना है कि उन्हें मूलभूत सुविधाएं मिलें, तो वे खुद बेहतर तरीके से मामलों को सुलझा सकेंगे। 

कुछ मामले
साइबर पुलिस ही सुलझा सकती है : शहर के स्थानीय थानों में हर साल साइबर अपराध से जुड़े करीब 4000 मामले दर्ज होते हैं, जिसमें 1200 मामले पूरी तरह साइबर अपराध के होते हैं। पुलिस थाने के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि साइबर अपराधी को शहर से बाहर जाकर गिरफ्तार करने के लिए उन्हें अपने ही वाहन का उपयोग करना पड़ता है। थाने के पुलिस निरीक्षक स्तर के अधिकारी के लिए एक वाहन दिया गया है। यह वाहन उनके ही काम आता है। स्टाफ की कमी दूर हो, तो स्थानीय पुलिस के पास मामले भेजने की मजबूरी नहीं होगी।

नागपुर में बढ़ा साइबर अपराध
संतरानगरी में हर साल साइबर अपराध थाने में करीब 700 से 800 मामले दर्ज हो रहे हैं। इसमें 90 प्रतिशत मामलों को स्थानीय थानों में भेजा जाता है। इनमें कई ऐसे मामले होते हैं, जो स्थानीय पुलिस की समझ से परे होते हैं। कई बार ऐसे मामलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। यही कारण है कि नागपुर में साइबर अपराध के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं 

ऐसे अपराध  पर लगाम लगाना उद्देश्य 
साइबर पुलिस थाना इसलिए बनाया गया था कि शहर में बढ़ते साइबर अपराध पर रोक लग सके। हर साल नागपुर के 33 थानों में 4000 ऐसे गंभीर मामले दर्ज हो रहे हैं, जिसकी जांच के लिए साइबर पुलिस की जरूरत है, लेकिन साइबर पुलिस थाना में स्टाफ ही नहीं है। नागपुर जिले की आबादी के अनुसार साइबर थाना के 16 पुलिस अधिकारी, कर्मचारी साइबर अपराधी पर कैसे शिकंजा कसेंगे, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है। 

डेटा निकालकर देने का काम
साइबर अपराध से जुड़े मामले में खुलकर खुद जांच करने की बात पर एक अधिकारी ने बताया कि साइबर पुलिस थाना बस डेटा निकालकर देने का काम कर रहा है। साइबर पुलिस थाना में कार्यरत कर्मचारियों का तबादला किया जा चुका है, लेकिन स्टाफ की कमी के कारण उन्हें अब तक छोड़ा नहीं गया है, जिससे वे साइबर थाने में ही कार्य कर रहे हैं।