दैनिक भास्कर हिंदी: रिश्वत लेने वाले पटवारी को पांच साल की जेल, 50 हजार रुपए जुर्मान भी देना होगा

November 16th, 2018

डिजिटल डेस्क, छतरपुर। खेती की जमीन नापने के एवज में पटवारी द्वारा किसान से रंगे हाथों रिश्वत लेने के मामले में गुरुवार को कोर्ट ने फैसला सुनाया है। विशेष न्यायाधीश आरके गुप्त की कोर्ट ने भ्रष्टचारी पटवारी को दोषी करार देते हुए पांच साल की कठोर कैद के साथ पचास हजार रुपए के जुर्माना की भी सजा सुनाई है। इस सम्बंध में वकील लखन राजपूत ने बताया कि फरियादी बहादुर सिंह परमार निवासी रसुइया ठाकुराइन ने 26 जून 2014 को शिकायत दर्ज कराई कि उसके पिता सुम्मेर सिंह परमार के नाम गांव में खेती की जमीन है। जमीन का नाप कराने के लिए तहसीलदार को आवेदन दिया था।

तहसीलदार ने आरआई और पटवारी को कार्यवाही करने के लिए निर्देश दिए थे। बहादुर जब पटवारी राकेश राजपूत से मिला, तो पटवारी ने नाप करने के एवज में तीन हजार रुपए रिश्वत की मांग की। फरियादी पटवारी को रिश्वत नहीं देना चाहता है। लोकायुक्त एसपी ने इस शिकायती आवेदन पर निरीक्षक केके अग्रवाल को कार्यवाही करने के लिए निर्देशित किया। 26 जून 2014 को ही फरियादी ने पटवारी से संपर्क करके रिश्वत संबंधी बातो को वॉयस रिकार्डर में रिकॉर्ड किया। 27 जून को लोकायुक्त पुलिस ने 3 हजार रुपए की राशि में फिनाफ्थलीन पाउडर लगाकर फरियादी को दिए और पुलिस दल फरियादी के साथ सागर से छतरपुर आया।

ट्रेप दल पटवारी राकेश के निजी कार्यालय श्रीराम नगर कॉलौंनी से कुछ दूर जाकर खड़े हो गए। फरियादी बहादुर सिंह अकेला पटवारी के घर गया और रिश्वत की राशि पटवारी को दी। लोकायुक्त पुलिस अचानक पटवारी के घर केअंदर आ गई। और पटवारी को रंगे हाथो रिश्वते लेते दबोच लिया। पुलिस ने आरोपी पटवारी राकेश राजपूत पटवारी हल्का नंबर 42 के खिलाफ पीसी एक्ट का मामला दर्ज कर चालान अदालत में पेश किया।

विशेष न्यायाधीश आरके गुप्त की कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि लोक सेवकों द्वारा भ्रष्टाचार किया जाना एक विकराल समस्या हो गई है,  जो समाज को खोखला कर रही है और देश के विकास में मुख्य बाधा है, इसलिए ऐसे आरोपी को सजा देने के दौरान नरम रुख अपनाया जाना कानून की मंशा के विपरीत है और भ्रष्टाचार के प्रति कठोर रुख अपनाया जाना समय की मांग है।