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नागपुर का हाल , मरीजों को डिस्चार्ज कर भूल जाता है प्रशासन

नागपुर का हाल , मरीजों को डिस्चार्ज कर भूल जाता है प्रशासन

डिजिटल डेस्क,नागपुर। कोरोना मरीजों के डिस्चार्ज करने संबंधी नए दिशा-निर्देश के बाद से नागपुर में बिना लक्षण वाले मरीजों को 10 दिन के बाद जांच किए बगैर डिस्चार्ज किया जा रहा है। गाइडलाइन के अनुसार मेडिकल ऑफिसर को इन मरीजों की हालत पर नजर रखना जरूरी है। डिस्चार्ज हुए कई मरीजों से बातचीत करने पर पता चला कि न तो उन्हें गाइडलाइन की पूरी जानकारी दी जा रही है और न ही फोन कर सेहत संबंधी पूछताछ की जा रही है।

डिस्चार्ज मरीजों के लिए यह हैं दिशा-निर्देश
डिस्चार्ज किए गए मरीज के घर में आइसोलेशन में रहने की सुविधा हो। {घर में मरीज की देखभाल करने वाला मौजूद होना चाहिए और उसे निरंतर अस्पताल के संपर्क रखना होगा।
प्रोटाकॉल के तहत मेडिकल ऑफिसर को देखभाल करने वाले व मरीज के निकट संपर्क में आने वालों को हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन प्रिस्क्राइब करना चाहिए। {मरीज को अपनी तबीयत के बारे मेंे नियमित रूप से जिला निगरानी अधिकारी को सूचित करना होगा।

किसी ने नहीं की है पूछताछ
मुझे अस्पताल से 11 दिन के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया। तब मुझसे कहा गया कि अगले 14 दिन तक मुझे घर में ही रहना है। समय पर दवा लेनी है और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने पर ध्यान देना है। घर आने के बाद अब तक कहीं से पूछताछ के लिए कोई फोन नहीं आया है। -प्रशांत (परिवर्तित नाम), सदर

कोई फोन कॉल नहीं आया
 डिस्चार्ज होकर घर आए 10 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। मेरी सेहत जानने के  लिए अब तक कहीं से फोन नहीं आया है, न ही हॉस्पिटल ने मुझे कोई फोन नंबर दिया है कि तबीयत खराब होने पर इस नंबर पर फोन कर जानकारी देनी है। -प्रवीण (परिवर्तित नाम), हंसापुरी

जोन के स्वास्थ्य अधिकारी की जिम्मेदारी
मरीजों को डिस्चार्ज होने के बाद भी मनपा ध्यान रखती है। उन्हें होम क्वारंेटाइन रहना होता है, इसलिए उनके घर के बाहर होम क्वारंेटाइन का स्टिकर लगा दिया जाता है। मरीज जिस जोन का होता है, उस जोन के स्वास्थ्य अधिकारी की जिम्मेदारी है कि वे मरीज की सेहत पर नजर रखें। -राम जोशी सहायक आयुक्त, मनपा

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