स्टेशनरी घोटाला: प्रशासन ने ली जिम्मेदारी, तब ही औषधि खरीदी को दी मंजूरी

January 13th, 2022

डिजिटल डेस्क, नागपुर । स्टेशनरी घोटाले ने मनपा में कोई भी आर्थिक लेन-देन के प्रस्ताव को मंजूरी देने से से पहले पदाधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग से स्थायी समिति को भेजे गए औषधि खरीदी के दो प्रस्ताव बाजार मूल्य के विवरण के साथ पेश करने की सूचना के साथ विभाग को वापस भेजे गए। तीसरी बार बाजार मूल्य विवरण का प्रस्ताव पेश करने के बाद 1 करोड़, 42 लाख रुपए की खरीदी को प्रशासन की जिम्मेदारी पर मंजूरी दी गई।

स्वास्थ्य विभाग ने दिए थे खरीदी के 2 प्रस्ताव
कोविड का प्रादुर्भाव बढ़ने के संकेत मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने दिसंबर के अंतिम सप्ताह और जनवरी के प्रथम सप्ताह स्थायी समिति में औषधि तथा अन्य स्वास्थ्य सामग्री खरीदी के प्रस्ताव रखे थे। रेट कांट्रैक्ट पर मनपा के रजिस्टर्ड कांट्रैक्टर से सामग्री खरीदी की जानी थी। 31 दिसंबर को हुई आमसभा में बाजार मूल्य से कई गुने दाम में विविध सामग्री खरीदी किए जाने के आरोप लगाए जाने से स्थायी समिति सतर्क हो गई। स्वास्थ्य विभाग के औषधि तथा अन्य सामग्री खरीदी प्रस्ताव बाजार मूल्य का वितरण के साथ पेश करने की सूचना के साथ प्रस्ताव िवभाग को पास कर दिए। स्थायी समिति की सूचना पर स्वास्थ्य विभाग ने मंगलवार को हुई स्थायी समिति की बैठक में खरीदी किए जाने वाली सामग्री का बाजार मूल्य के साथ प्रस्ताव पेश करने पर मंजूरी दी। स्थायी समिति सभापति प्रकाश भोयर ने कहा कि प्रशासन की ओर से पेश किए गए बाजार मूल्य का विवरण और सप्लायर के रेट कांट्रैक्ट की पड़ताल करने के बाद अधिकारियों की जिम्मेदारी पर खरीदी प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। दो प्रस्ताव एकत्रित जोड़कर 1 करोड़, 42 लाख रुपए की खरीदी का प्रस्ताव मंजूर किया गया।

स्टेशनरी घोटाले ने मचाई है खलबली
स्वास्थ्य विभाग में स्टेशनरी घोटाला सामने आने पर मनपा में खलबली मच गई है। फर्जी बिल जोड़कर बिना सामग्री सप्लाय किए एक ही ठेकेदार की 5 कंपनियों को 67 लाख रुपए का भुगतान किया गया। इस मामले में 2 सप्लायर और 3 मनपा कर्मचारी गिरफ्तार है। इस घटना से मनपा प्रशासन में खलबली मच गई। आयुक्त ने गत एक साल में मनपा के सभी विभागों में हुए आर्थिक लेन-देन की जांच के लिए आंतरिक जांच शुरू की है। स्थायी समिति ने भी जांच की पहल की। तीन सदस्यों की समिति गठित की गई, लेकिन प्रशासन ने समिति को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। विधि विभाग की सलाह लेकर स्थायी समिति को जांच समिति गठित करने का अधिकार नहीं रहने का स्पष्टीकरण देकर प्रस्ताव अस्वीकृत किया गया।