दैनिक भास्कर हिंदी: 10 मई के बाद सतना नदी से रेलवे  स्टेशन को नहीं मिल पाएगा एक बूंद पानी !

April 13th, 2019

डिजिटल डेस्क,सतना। मुंबई-हावड़ा मुख्य रेल मार्ग के प्रमुख जंक्शन सतना में हर साल की तरह इस वर्ष भी भीषण जल संकट की आशंका बढ़ती जा रही है। रेलवे के जानकार सूत्रों की मानें तो स्टेशन और रेलवे कालोनी के लिए जल के इकलौते स्त्रोत सतना नदी में अब एक बूंद पानी की गुंजाइश नहीं बची है। माना जा रहा है कि 10 मई के पहले अगर रेलवे ने जल के समुचित प्रबंध नहीं किए तो हालात बिगड़ सकते हैं। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वक्त रहते इस वर्ष भी टैंकर से पानी की सप्लाई के लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। माना जा रहा है कि जल परिवहन के कारण रेलवे पर तकरीबन 1 करोड़ का अतिरिक्त आर्थिक भार आएगा।

7 करोड़ के प्रोजेक्ट को बड़ा झटका - टमस से सप्लाई देने जल संसाधन का इंकार

उधर, ललितपुर-सिंगरौली रेल प्रोजेक्ट के तहत सतना स्टेशन को टमस नदी से सतत जल की आपूर्ति के लिए रेलवे की 7 करोड़ की एक अति महत्वाकांक्षी योजना को बड़ा झटका लगा है। राज्य सरकार के जल संसाधन विभाग ने जल की अनुपलब्धता का हवाला देकर टमस नदी से रेलवे को पानी देने से इंकार कर दिया है। रेलवे ने जल संसाधन को पत्र लिख कर शहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित टमस नदी से पाइप लाइन के जरिए सतना स्टेशन तक पानी लाने की अनुमति मांगी थी। अगर, रेलवे के साथ इस मसले पर सहमति बन जाती तो जल संकट से जूझ रहे सतना जंक्शन ही नहीं सगमा, हिनौता, रामवन,सकरिया और कैमा स्टेशनों को भी इस समस्या से हमेशा के लिए निजात मिल जाती। टमस नदी से रेलवे को रोज 3 एमएलडी पानी की उम्मीद थी। 

नगर निगम ने भी उठाए हाथ

सूत्रों ने बताया कि जलसंसाधन से निराश रेल प्रशासन ने स्टेशन में रोज 3 से 5 लाख लीटर पानी की आपूर्ति के लिए नगर निगम प्रशासन से भी संपर्क साधा था। मगर, निगम ने भी इस मसले पर रेलवे की मदद करने में असमर्थता जताई है।  

रोज चाहिए 5 लाख लीटर पेयजल 

जानकारों ने बताया कि सतना जंक्शन में हर दिन तकरीबन 5 लाख लीटर पेयजल की जरुरत पड़ती है। इस स्टेशन से 24 घंटे में 117 यात्री और लगभग 40 मालगाडिय़ां अप डाउन करती हैं। इस बीच यहां 35 से 40 हजार यात्रियों का मूवमेंट रहता है। कटनी-मानिकपुर के बीच स्थित सतना एक ऐसा जंक्शन है, जहां हर यात्री गाड़ी का कमर्शियल के साथ टेक्निकल स्टापेज भी है। इसके अलावा स्टेशन में साफ -सफाई के लिए प्रतिदिन कम से कम 50 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होती है।   

11 वर्ष पूर्व जबलपुर से लाया गया था नर्मदा जल

सतना स्टेशन और उसकी रेलवे कालोनी में भीषण जल संकट कोई नई बात नहीं है। हर वर्ष गर्मी के 4 माह यहां पेयजल के लिए हाहाकार मचता है। ऐसे ही एक संकट के चलते वर्ष 2008 में रेलवे को मालगाड़ी के टैंकर के माध्यम से जबलपुर से यहां नर्मदा जल लाना पड़ा था। क्या, इस बार ऐसे ही हालात बनेंगे? अभी ये तय होना बाकी है, मगर इतना तय है कि इकलौते जलस्त्रोत सतना नदी की धार टूट चुकी है।