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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पर अनियमितता के आरोप

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पर अनियमितता के आरोप

डिजिटल डेस्क,नागपुर। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश पर अग्रिम जमानत से जुड़े एक मामले में अनिमियतता के आरोपों पर बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर खंडपीठ ने गंभीर संज्ञान लिया है। न्या.रोहित देव की खंडपीठ ने सत्र न्यायाधीश द्वारा दो आरोपियों को दी गई अग्रिम जमानत रद्द करके प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश को स्वयं इस मामले में सुनवाई करने के आदेश दिए हैं। इतना ही नहीं, हाईकोर्ट ने कहा कि न्याय व्यवस्था पर लोगों का विश्वास हर हाल में कायम रहना चाहिए। इसलिए जरूरी है कि अनियमितता के इन आरोपों की विस्तृत आंतरिक जांच हो, ताकि सच सामने आ सके। हाईकोर्ट के अनुसार, मामले में विस्तृत जांच के दौरान शायद कोई ऐसी स्पष्टीकरण सुनने को मिले, जो स्वीकार करने योग्य हो। चूंकि इस प्रकरण में  न्यायाधीश पर अनियमितता के आरोप हैं, ऐसे में उनके द्वारा दिए गए विवादित फैसले को रद्द करना जरूरी है। हाईकोर्ट ने मामले के संबंधित आरोपियों की अग्रिम जमानत खारिज करके प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश को आरोपियों की अग्रिम जमानत पर 7 दिन में फैसला करने को कहा है। तब तक आरोपियों को गिरफ्तारी से राहत दी गई है। उन्हें 23 फरवरी को निचली अदालत में हाजिर होने के आदेश दिए गए हैं। 

प्राथमिक रिपोर्ट में माना शिकायत में तथ्य है
निचली अदालत पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर हाईकोर्ट ने संज्ञान लिया। याचिकाकर्ता के आराेपों पर हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2021 को प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश को मामले में जांच के आदेश दिए। 3 फरवरी 2021 को प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें याचिकाकर्ता की शिकायत में ठोस तथ्य पाए गए। ऐसे में हाईकोर्ट ने तय किया है कि इस मामले में अब विस्तृत जांच की जानी चाहिए, ताकि मामले की हकीकत सामने आ सके। 

अग्रिम जमानत याचिका ठुकरा दी थी
शहर के जरीपटका पुलिस थाने में एड. प्रकाश गायकवाड़ (57, निवासी गणेशपेठ) और नीरज सोनी (44, मॉडर्न मिल) के खिलाफ एक व्यक्ति को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में भादवि 306, 420, 467, 468, 471 -34 के तहत मामला दर्ज किया गया था। 13 सितंबर 2019 को उक्त दोनों आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिका ठुकरा दी थी। इस आदेश पर जज के हस्ताक्षर के बाद इसे वेबसाइट पर भी अपलोड किया गया था। जब मामले में फिर इसी प्रकरण में निचली अदालत ने 3 जनवरी 2020 को नया आदेश जारी किया, जिसमें आरोपियों को अग्रिम जमानत प्रदान की गई। ऐसे में मृतक की पत्नी विद्या कोटांगले ने इस पर आपत्ति लेते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से एड. आर. एच. रावलानी और एस. एस. डोईफोड़े ने पक्षा रखा।

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डिजिटल डेस्क, जबलपुर। किसी के लिए भी प्रॉपर्टी खरीदना जीवन के महत्वपूर्ण कामों में से एक होता है। आप सारी जमा पूंजी और कर्ज लेकर अपने सपनों के घर को खरीदते हैं। इसलिए यह जरूरी है कि इसमें इतनी ही सावधानी बरती जाय जिससे कि आपकी मेहनत की कमाई को कोई चट ना कर सके। प्रॉपर्टी की कोई भी डील करने से पहले पूरा रिसर्च वर्क होना चाहिए। हर कागजात को सावधानी से चेक करने के बाद ही डील पर आगे बढ़ना चाहिए। हालांकि कई बार हमें मालूम नहीं होता कि सही और सटीक जानकारी कहा से मिलेगी। इसमें bhaskarproperty.com आपकी मदद कर सकता  है। 

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ध्यान रखें की प्रॉपर्टी RERA अप्रूव्ड हो 
कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इस बात का ध्यान रखे कि वो भारतीय रियल एस्टेट इंडस्ट्री के रेगुलेटर RERA से अप्रूव्ड हो। रियल एस्टेट रेगुलेशन एंड डेवेलपमेंट एक्ट, 2016 (RERA) को भारतीय संसद ने पास किया था। RERA का मकसद प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना और रियल एस्टेट सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देना है। राज्य सभा ने RERA को 10 मार्च और लोकसभा ने 15 मार्च, 2016 को किया था। 1 मई, 2016 को यह लागू हो गया। 92 में से 59 सेक्शंस 1 मई, 2016 और बाकी 1 मई, 2017 को अस्तित्व में आए। 6 महीने के भीतर केंद्र व राज्य सरकारों को अपने नियमों को केंद्रीय कानून के तहत नोटिफाई करना था।